'आप' में महाबगावत: राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने छोड़ी पार्टी, तीन थामेंगे भाजपा का दामन
आम आदमी पार्टी के सात सांसदों का इस्तीफा और राघव चड्ढा की भाजपा में एंट्री ने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है
नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए आज का दिन किसी बड़े राजनीतिक भूकंप से कम नहीं रहा। अरविंद केजरीवाल के बेहद भरोसेमंद माने जाने वाले राघव चड्ढा सहित पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने एक साथ इस्तीफा देकर पार्टी की नींव हिला दी है। चौंकाने वाली बात यह है कि राघव चड्ढा और दो अन्य सांसदों ने इस्तीफा देने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। इस सामूहिक इस्तीफे के बाद देश की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
विपक्ष का हमला: "खरीद-फरोख्त की राजनीति"
इस घटनाक्रम पर डीएमके नेता टीकेएस एलंगोवन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या है। एलंगोवन ने कहा:
"भाजपा सांसदों और विधायकों की सबसे बड़ी खरीदार है। उन्हें लोकतंत्र या संविधान में कोई भरोसा नहीं है। सत्ता हथियाने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह भारत की सबसे खराब राजनीतिक संस्कृति का उदाहरण है।"
भाजपा का पलटवार: 'शीश महल' और भ्रष्टाचार के आरोप
सांसदों के टूटने को भाजपा ने केजरीवाल के 'भ्रष्ट तंत्र' की विफलता बताया है। भाजपा नेता प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल पर निजी हमले करते हुए चार तीखे सवाल पूछे:
- बंगले के नवीनीकरण (शीश महल) के लिए पैसा कहां से आया?
- क्या इसी भ्रष्टाचार के डर से नेता पार्टी छोड़ रहे हैं?
- दो कमरे के फ्लैट का वादा करने वाले को बार-बार 'शीश महल' की जरूरत क्यों पड़ रही है?
- नए निर्माण में किस कारोबारी का पैसा लगा है, इसका खुलासा होना चाहिए।
वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के सिद्धांतों को ताक पर रख दिया है। उन्होंने पंजाब सरकार को 'माफिया गिरोह' द्वारा संचालित बताया और कहा कि अदालतें भी अब केजरीवाल के भ्रष्टाचार को पहचान चुकी हैं।
सपा की नसीहत: "रणनीतिक गलती का नतीजा"
इंडिया गठबंधन में सहयोगी रही समाजवादी पार्टी ने भी इस पर दुख जताया, लेकिन साथ ही 'आप' के नेतृत्व को आईना भी दिखाया। सपा प्रवक्ता डॉ. आशुतोष वर्मा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने उन कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जिन्होंने उसे फर्श से अर्श तक पहुंचाया।
कार्यकर्ताओं की अनदेखी: वर्मा के अनुसार, वोट तो गरीबों, दलितों और पिछड़ों ने दिया, लेकिन राज्यसभा भेजने के समय पार्टी को सिर्फ बड़े नाम (राघव चड्ढा, मित्तल, गुप्ता) याद आए।
सीखने की जरूरत: उन्होंने कहा कि अगर पार्टी ने अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका दिया होता, तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।
क्या होगा 'आप' का अगला कदम?
राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल जैसे दिग्गज चेहरों का जाना आम आदमी पार्टी के लिए न केवल राज्यसभा में संख्या बल का नुकसान है, बल्कि साख की भी बड़ी लड़ाई है। दिल्ली और पंजाब में पूर्ण बहुमत की सरकार चलाने वाली 'आप' के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केजरीवाल जल्द ही डैमेज कंट्रोल नहीं करते, तो आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल, दिल्ली की सियासत में 'इस्तीफों' के इस दौर ने 2029 की तैयारियों में जुटे विपक्षी खेमे को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है।
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