आईवीएफ खर्च का भूलभुलैया: डॉ. प्रगति भारती ने बताया अनचाहे खर्चों से बचने का 'स्मार्ट चेकलिस्ट'

आईवीएफ के अनचाहे खर्चों से कैसे बचें? डॉ. प्रगति भारती से जानें खर्च की पारदर्शिता के लिए जरूरी चेकलिस्ट और महत्वपूर्ण टिप्स।

Jan 27, 2026 - 17:11
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आईवीएफ खर्च का भूलभुलैया: डॉ. प्रगति भारती ने बताया अनचाहे खर्चों से बचने का 'स्मार्ट चेकलिस्ट'

वाराणसी: संतान सुख की चाह में आईवीएफ (IVF) का रास्ता चुनने वाले दंपतियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती शारीरिक और मानसिक से कहीं अधिक 'आर्थिक स्पष्टता' की होती है। अक्सर इलाज शुरू होने के बाद सामने आने वाले 'हिडन चार्जेस' मरीजों के तनाव को दोगुना कर देते हैं। इसी उलझन को सुलझाने के लिए बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, वाराणसी की विशेषज्ञ डॉ. प्रगति भारती ने पारदर्शिता के महत्व और मरीजों के लिए एक विशेष गाइडलाइन साझा की है।

खर्च की पारदर्शिता ही नैतिक उपचार का आधार
डॉ. प्रगति भारती के अनुसार, फर्टिलिटी डॉक्टर की जिम्मेदारी सिर्फ मेडिकल परामर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज को यह समझाना भी है कि वे किस सेवा के लिए कितना भुगतान कर रहे हैं। आईवीएफ एक बहु-चरणीय प्रक्रिया है, जहाँ हर कदम पर वित्तीय स्पष्टता आवश्यक है।

मरीजों के लिए 'खर्च की चेकलिस्ट':
1. साइकल लागत का ब्रेकअप: अक्सर क्लीनिक एक मुश्त राशि (Package) बताते हैं। मरीजों को यह पूछना चाहिए कि क्या इसमें डॉक्टर की फीस, अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट, एग रिट्रीवल और भ्रूण स्थानांतरण (Embryo Transfer) शामिल है?

2. दवाओं का 'भारी' बजट: आईवीएफ में हार्मोनल इंजेक्शन और दवाओं का खर्च कुल लागत का लगभग 20% तक हो सकता है। यह कोई छोटा खर्च नहीं है, इसलिए मरीजों को दवाओं की एक संभावित 'रेंज' पहले ही पूछ लेनी चाहिए।

3. ऐड-ऑन प्रक्रियाओं की वास्तविकता: भ्रूण फ्रीजिंग, जेनेटिक टेस्टिंग (PGT) या ब्लास्टोसिस्ट कल्चर जैसे 'ऐड-ऑन' हर मरीज के लिए जरूरी नहीं होते। मरीजों को यह सवाल करना चाहिए कि क्या उनके विशेष केस में इन प्रक्रियाओं से सफलता की दर वास्तव में बढ़ेगी?

4. आकस्मिक बदलाव और रिफंड: यदि किसी कारणवश साइकल बीच में रद्द करना पड़े या योजना बदलनी पड़े, तो रिफंड पॉलिसी क्या होगी? स्टोरेज फीस और कैंसिलेशन चार्ज की जानकारी लिखित में होना अनिवार्य है।

मौखिक आश्वासनों के बजाय हमेशा लिखित अनुमान (Written Estimate) लें। जब आर्थिक योजना स्पष्ट होती है, तो दंपति तनावमुक्त होकर इलाज पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। पारदर्शिता ही सफल उपचार की पहली सीढ़ी है।

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