'वंचितों का उत्थान और सामाजिक न्याय सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता' — लाल सिंह आर्य
लाल सिंह आर्य ने डीयू में शिक्षकों से संवाद कर वंचित वर्गों के सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय की प्रतिबद्धता दोहराई।
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के गांधी भवन में आयोजित 'शिक्षक संवाद' कार्यक्रम में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने दलित और पिछड़ा वर्ग के प्राध्यापकों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान सरकार के एजेंडे में वंचित वर्गों के मुद्दे सबसे ऊपर हैं और पिछले एक दशक में राजनीति से ऊपर उठकर उनकी समस्याओं का ठोस समाधान किया गया है।
संवाद के दौरान शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षा मंत्रालय के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। मुख्य रूप से कॉलेजों में प्रिंसिपल पदों पर आरक्षण लागू करने, प्रशासनिक उच्च पदों पर उचित प्रतिनिधित्व देने और 'नॉट फाउंड सूटेबल' (NFS) के नाम पर रिक्तियों को न भरने जैसी विसंगतियों पर चिंता जताई गई। शिक्षकों ने डीयू में 'दलित स्टडी सेंटर' और 'डॉ. अंबेडकर चेयर' की स्थापना की भी मांग की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गांधी भवन के निदेशक प्रो. के.पी. सिंह ने बताया कि कुलपति प्रो. योगेश सिंह के नेतृत्व में पिछले चार वर्षों में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। उन्होंने लगभग 5,000 स्थायी नियुक्तियों और 23,000 प्रमोशन का हवाला देते हुए कहा कि सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए आरक्षित वर्ग के शिक्षकों को गवर्निंग बॉडी और महत्वपूर्ण समितियों में स्थान दिया जा रहा है।
लाल सिंह आर्य ने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि नियुक्तियों में वरिष्ठता की अनदेखी और बैकलॉग पदों जैसे विषयों को सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जाएगा। उन्होंने 1857 की क्रांति के दलित नायकों—ऊदा देवी, झलकारीबाई और बिजली पासी—के योगदान को पाठ्यक्रमों में शामिल करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत-2047' के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वंचित वर्गों की मुख्यधारा में भागीदारी अनिवार्य है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0