गर्भधारण में 'इंतज़ार' की आदत कहीं भारी न पड़ जाए: क्यों ज़रूरी है समय पर फर्टिलिटी जाँच?

फर्टिलिटी जाँच में देरी इलाज को कठिन बना सकती है। जानें क्यों समय पर विशेषज्ञों से परामर्श लेना माता-पिता बनने के लिए ज़रूरी है।

Dec 17, 2025 - 22:32
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गर्भधारण में 'इंतज़ार' की आदत कहीं भारी न पड़ जाए: क्यों ज़रूरी है समय पर फर्टिलिटी जाँच?

लखनऊ: माता-पिता बनने का सपना हर दंपत्ति के लिए बेहद खास और भावनात्मक होता है। ज़्यादातर जोड़ों की कोशिश यही रहती है कि वे 'स्वाभाविक' रूप से ही इस सुख को प्राप्त करें। लेकिन अक्सर यह स्वाभाविक इंतज़ार कब सालों में बदल जाता है, इसका अंदाज़ा नहीं लग पाता। फर्टिलिटी विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भधारण के लिए केवल किस्मत और उम्मीद पर निर्भर रहना कभी-कभी इलाज की राह को मुश्किल बना सकता है।

उम्मीद और हकीकत के बीच का अंतर
बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, लखनऊ की फर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. श्रेया गुप्ता बताती हैं कि कई दंपत्ति हमारे पास तब आते हैं जब वे तीन से पांच साल तक खुद से कोशिश कर चुके होते हैं। आंकड़ों के अनुसार, इनफर्टिलिटी का सामना कर रहे दंपत्तियों को मेडिकल परामर्श लेने में औसतन 3.2 साल लग जाते हैं। इनमें से 2 साल तो केवल यह सोचने में निकल जाते हैं कि 'सब अपने आप हो जाएगा'।

जैविक रूप से, यह दो-तीन साल का समय बहुत कीमती होता है। इस दौरान महिला की उम्र (Maternal Age) बढ़ने से अंडों की गुणवत्ता और संख्या (Ovarian Reserve) कम होने लगती है। साथ ही, शुक्राणुओं की गुणवत्ता, थायरॉइड की समस्या या एंडोमेट्रियोसिस जैसी जटिलताएं चुपचाप शरीर में घर कर सकती हैं।

क्या छुपा ले जाता है 'स्वाभाविक प्रयास'?
कई बार गर्भधारण न होने के पीछे ऐसे कारण होते हैं जिनके कोई बाहरी लक्षण नज़र नहीं आते। बिना डॉक्टरी जाँच के यह पता लगाना लगभग नामुमकिन है कि:

क्या फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक हैं?

क्या ओव्यूलेशन (अंडा बनने की प्रक्रिया) सही ढंग से हो रहा है?

क्या शुक्राणुओं की गतिशीलता (Motility) या आकार सामान्य है?

क्या गर्भाशय में कोई छिपा हुआ फाइब्रॉइड या पॉलिप तो नहीं?

डॉ. गुप्ता के अनुसार, "शुरुआत में जो समस्या एक छोटी सी दवा या लाइफस्टाइल बदलाव से ठीक हो सकती थी, देरी होने पर वही समस्या आईवीएफ (IVF) जैसे उन्नत और महंगे उपचार की ज़रूरत पैदा कर देती है।"

जाँच का मतलब 'हार मानना' नहीं है
समाज में एक गलत धारणा है कि फर्टिलिटी विशेषज्ञ के पास जाने का मतलब है कि अब आप स्वाभाविक रूप से माता-पिता नहीं बन सकते। डॉ. श्रेया स्पष्ट करती हैं कि AMH टेस्ट, वीर्य विश्लेषण (Semen Analysis) और अल्ट्रासाउंड जैसी शुरुआती जाँचें दरअसल आपको 'स्मार्ट तरीके' से कोशिश करने में मदद करती हैं। यदि रिपोर्ट में सब सामान्य आता है, तो आप बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी कोशिश जारी रख सकते हैं। और यदि कोई छोटी समस्या है, तो उसे समय रहते ठीक कर स्वाभाविक गर्भधारण की संभावना को बढ़ाया जा सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह: कब लें परामर्श?
समय रहते कदम उठाना ही सफल इलाज की कुंजी है। विशेषज्ञों के अनुसार:

35 वर्ष से कम आयु: यदि 12 महीने तक नियमित और असुरक्षित संबंध के बाद भी गर्भधारण न हो।

35 वर्ष से अधिक आयु: यदि 6 महीने की कोशिश के बाद भी परिणाम न मिले।

पैरेंटहुड की यात्रा में 'धैर्य' ज़रूरी है, लेकिन 'जागरूकता' उससे भी कहीं अधिक आवश्यक है। सही समय पर ली गई सलाह न केवल शारीरिक और आर्थिक बोझ को कम करती है, बल्कि आपके माता-पिता बनने के सपने को सच करने की दिशा में एक ठोस कदम साबित होती है।

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