मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, मध्य प्रदेश में भाजपा की निर्विरोध जीत
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद भाजपा ने तीनों सीटें निर्विरोध जीत ली हैं
भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राज्य की तीन खाली सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सभी सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल कर ली है। यह स्थिति तब पैदा हुई जब चुनाव अधिकारी ने कड़ी संवीक्षा (स्क्रूटनी) के बाद कांग्रेस की इकलौती उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया।
भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर ने नटराजन की उम्मीदवारी को अमान्य घोषित कर दिया। भाजपा का आरोप था कि कांग्रेस नेता ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित कानूनी मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई। भाजपा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत कोर्ट समन से जुड़ी हर जानकारी देना अनिवार्य है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया। कांग्रेस के कानूनी दल का तर्क था कि यह मामला केवल हैदराबाद की एक अदालत द्वारा जारी किया गया कारण बताओ नोटिस था, न कि कोई औपचारिक आपराधिक मामला या प्राथमिकी (FIR)। इसलिए नियमों के मुताबिक इसे सार्वजनिक करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं थी।
इस घटनाक्रम ने पूरे चुनावी समीकरण को बदल दिया। 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए 58 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जिससे उसकी दो सीटों पर जीत पक्की थी, लेकिन तीसरे उम्मीदवार महेश केवट के लिए उसके पास पर्याप्त वोट नहीं थे। वहीं, कांग्रेस के पास 61 वैध वोट थे, जिससे उसकी एक सीट तय मानी जा रही थी। हॉर्स-ट्रेडिंग की आशंका के चलते कांग्रेस अपने विधायकों को बेंगलुरु भेजने की तैयारी में थी, लेकिन इस फैसले से पासा पलट गया।
मैदान में केवल तीन भाजपा उम्मीदवार—तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट ही बचे, जिन्हें चुनाव आयोग ने निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया। इस फैसले से नाराज कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या और "संवैधानिक साजिश" करार दिया है और न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
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