डिजिटल खेती के दौर में अनधिकृत कीटनाशकों का खतरा: क्या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बन रहे हैं 'सेफ हेवन'?

क्रॉपलाइफ इंडिया ने ई-कॉमर्स पर अनधिकृत कीटनाशकों की बिक्री पर चिंता जताते हुए 'पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल 2025' में कड़े बदलावों की मांग की है।

Jan 23, 2026 - 19:18
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डिजिटल खेती के दौर में अनधिकृत कीटनाशकों का खतरा: क्या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बन रहे हैं 'सेफ हेवन'?

लखनऊ: भारत में कृषि क्षेत्र का डिजिटलीकरण जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। 17 प्रमुख अनुसंधान-आधारित फसल संरक्षण कंपनियों के संगठन, क्रॉपलाइफ इंडिया ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अनधिकृत और अवैध कीटनाशकों की बढ़ती बिक्री पर गहरा संज्ञान लिया है। संगठन ने आगाह किया है कि बिना जवाबदेही और लाइसेंस की स्पष्टता के बेचे जा रहे ये रसायन किसानों की फसल और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। क्रॉपलाइफ इंडिया का तर्क है कि जहां पारंपरिक दुकानों को कीटनाशक बेचने के लिए कड़े लाइसेंस और भौगोलिक सीमाओं का पालन करना पड़ता है, वहीं ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर 'मार्केटप्लेस मॉडल' और 'इन्वेंट्री-आधारित मॉडल' के नाम पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

नियामक ढांचे में बड़ी खामी वर्तमान में कीटनाशक अधिनियम, 1968 और 1971 के नियमों के तहत किसी भी कीटनाशक की बिक्री के लिए वैध 'प्रिंसिपल सर्टिफिकेट' और लाइसेंस अनिवार्य है। हालांकि, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को वर्तमान में अलग से लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होती। इस 'कानूनी शून्य' (Regulatory Gap) का फायदा उठाकर कई विक्रेता बिना पंजीकरण के अवैध उत्पाद किसानों तक पहुँचा रहे हैं।

सरकार का रुख: केवल GST चेक करना काफी नहीं सम्मेलन में कृषि आयुक्त डॉ. पी. के. सिंह ने सख्त लहजे में कहा कि "खतरनाक कृषि-इनपुट्स बेचते समय ई-कॉमर्स कंपनियों का केवल विक्रेताओं के जीएसटी दस्तावेजों की जांच करना पर्याप्त नहीं है।" उन्होंने जोर दिया कि उत्पादों की गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी (उत्पाद के स्रोत की जानकारी) और आपूर्ति श्रृंखला की पूरी जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं, CIB&RC के सचिव डॉ. सुभाष चंद ने स्पष्ट किया कि कीटनाशक कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं हैं; इनकी ऑनलाइन बिक्री में विनिर्माता और प्लेटफॉर्म, दोनों को समान रूप से उत्तरदायी होना होगा।

पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल, 2025 से उम्मीदें क्रॉपलाइफ इंडिया के चेयरमैन अंकुर अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि उद्योग ई-कॉमर्स के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह इसके लिए 'समान अवसर' (Level Playing Field) और सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि आगामी पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल, 2025 में डिजिटल व्यापार की विशिष्टताओं को शामिल किया जाना चाहिए।

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