गाँव की पगडंडियों से 'अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार' तक: श्री कृष्ण शुक्ल की सफलता की महागाथा

बस्ती के लाल श्री कृष्ण शुक्ल को अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार 2025। महाकुंभ और रेलवे प्रबंधन में उनकी अद्वितीय यात्रा।

Jan 5, 2026 - 11:58
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गाँव की पगडंडियों से 'अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार' तक: श्री कृष्ण शुक्ल की सफलता की महागाथा

गोरखपुर/बस्ती: भारतीय रेल की प्रगति के पीछे उन अधिकारियों का विजन और पसीना होता है जो दिन-रात पटरियों की गति और यात्रियों की सुरक्षा के लिए समर्पित रहते हैं। ऐसे ही एक असाधारण व्यक्तित्व हैं श्री कृष्ण शुक्ल (IRTS 2007 बैच), जो वर्तमान में मुख्य माल यातायात प्रबंधक (CFTM), पूर्वोत्तर रेलवे (NER), गोरखपुर के पद पर कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के एक छोटे से गाँव से निकलकर भारतीय रेलवे के सर्वोच्च सम्मानों में से एक 'अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार 2025' तक का उनका सफर करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मिट्टी से जुड़ाव और मेधावी छात्र जीवन
श्री कृष्ण शुक्ल मूल रूप से बस्ती जिले के ग्राम सेवरा लाला (छावनी) के निवासी हैं। उनकी सफलता की नींव उनके गाँव के ही प्राथमिक विद्यालय में पड़ी। उन्होंने हाईस्कूल की शिक्षा अशोक इंटर कॉलेज, छावनी से प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने अपने ननिहाल सुल्तानपुर के वलीपुर स्थित PPIC से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की।

शिक्षा के प्रति उनका समर्पण ऐसा था कि उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। बीएससी (मैथ्स ग्रुप) में उन्होंने विश्वविद्यालय टॉप किया और एमएससी (केमिस्ट्री) में तीन गोल्ड मेडल जीतकर एक कीर्तिमान स्थापित किया।

वैज्ञानिक बनने की राह और UPSC का बुलावा
अकादमिक क्षेत्र में श्री शुक्ल की पकड़ इतनी मजबूत थी कि उन्होंने तीन बार CSIR-JRF की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित श्यामा प्रसाद मुखर्जी फेलोशिप के लिए NCL पुणे बुलाया गया। यदि वे उस राह पर चलते, तो आज देश के बड़े वैज्ञानिकों में शुमार होते, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इसी दौरान उनका चयन UPSC (भारतीय रेल यातायात सेवा) में हो गया और उन्होंने राष्ट्र सेवा के लिए रेलवे को चुना।

रेलवे में एक 'संकटमोचक' की पहचान
2007 बैच के IRTS अधिकारी के रूप में श्री शुक्ल ने रेलवे के कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने मंडल यातायात प्रबंधक (टुंडला), SrDSO (आगरा), SrDOM (झांसी) और SrDOM (प्रयागराज) जैसे पदों पर रहते हुए परिचालन और सुरक्षा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए।

उनकी विशेषज्ञता केवल देश तक सीमित नहीं रही। उन्होंने:

चीन से हाई स्पीड रेल की ट्रेनिंग ली।

सिंगापुर और कोरिया से लीडर्स इन अर्बन ट्रांसपोर्ट (LUTP) का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

IIM बैंगलोर से मैनेजमेंट में मास्टर्स (PGPPM) की डिग्री हासिल की, जो उनके प्रशासनिक कौशल को और धार देती है।

महाकुंभ 2025: जब रेल मंत्री ने की मुक्तकंठ प्रशंसा
प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करना एक हिमालयी चुनौती थी। श्री कृष्ण शुक्ल ने अपनी रणनीतिक योजना और प्रबंधन से इसे संभव कर दिखाया। उनके इस 'अद्वितीय योगदान' की स्वयं माननीय रेल मंत्री ने प्रशंसा की है। भीड़ प्रबंधन और ट्रेनों के सुचारू संचालन में उनके द्वारा अपनाई गई तकनीकों की आज पूरे रेलवे विभाग में चर्चा है।

खेल के मैदान में भी 'गोल्डन बॉय'
श्री शुक्ल केवल फाइलों और पटरियों के जादूगर नहीं हैं, बल्कि वे एक ऊर्जावान खिलाड़ी भी हैं। वे एक उत्कृष्ट तैराक, धावक और बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। उन्होंने उत्तर मध्य रेलवे (NCR) में दो बार मिनी मैराथन में गोल्ड मेडल और बैडमिंटन डबल्स में भी गोल्ड मेडल जीतकर यह साबित किया है कि एक स्वस्थ शरीर में ही एक कुशाग्र बुद्धि निवास करती है।

सम्मानों का सिलसिला
उनके उत्कृष्ट कार्यों की फेहरिस्त बहुत लंबी है, जिसके लिए उन्हें लगातार सम्मानित किया गया है:

GM अवार्ड (2013): करियर के शुरुआती दौर में ही उनकी कार्यक्षमता को पहचान मिली।

विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार (2024): परिचालन में नवाचार के लिए।

अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार (2025): रेलवे का वह शीर्ष सम्मान, जो केवल असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है।

बस्ती के एक छोटे से गाँव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण लेने और भारतीय रेलवे को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले श्री कृष्ण शुक्ल की कहानी यह बताती है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और जिले के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और भारतीय रेल के लिए एक गौरवपूर्ण अध्याय है।

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