डॉ. मधुलिका सिंह ने बताया कैसे गिरता टेस्टोस्टेरॉन बन रहा है पिता बनने में बाधा

डॉ. मधुलिका सिंह ने बताया कैसे डायबिटीज़ और कम टेस्टोस्टेरॉन पुरुषों की फर्टिलिटी और आईवीएफ परिणामों को प्रभावित करते हैं।

Dec 17, 2025 - 22:25
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डॉ. मधुलिका सिंह ने बताया कैसे गिरता टेस्टोस्टेरॉन बन रहा है पिता बनने में बाधा

प्रयागराज: आधुनिक जीवनशैली और असंतुलित खान-पान के कारण टाइप 2 डायबिटीज़ अब केवल एक मेटाबॉलिक बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, प्रयागराज की फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. मधुलिका सिंह ने पुरुषों के स्वास्थ्य से जुड़े एक ऐसे 'छिपे हुए त्रिकोण' की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जिसके बारे में जागरूकता की भारी कमी है। यह त्रिकोण है— बढ़ती ब्लड शुगर, गिरता टेस्टोस्टेरॉन और प्रभावित होती फर्टिलिटी।

डायबिटीज़ और शुक्राणु की गुणवत्ता पर प्रहार
डॉ. मधुलिका सिंह के अनुसार, जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित होता है, तो इसका सीधा असर शुक्राणुओं (Sperm) पर पड़ता है। शोधों के हवाले से उन्होंने बताया कि डायबिटीज़ से ग्रस्त पुरुषों में वीर्य के आयतन (Volume), शुक्राणुओं की संख्या और उनकी गतिशीलता (Motility) में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है।

अध्ययनों में पाया गया है कि डायबिटीज़ न केवल ऊपरी तौर पर शुक्राणुओं को प्रभावित करती है, बल्कि यह उनके डीएनए (DNA) के स्तर पर भी विखंडन और एपिजेनेटिक बदलाव कर सकती है। इसका अर्थ यह है कि यदि कोई पुरुष फर्टिलिटी उपचार (जैसे IVF या IUI) की योजना बना रहा है, तो अनियंत्रित शुगर के कारण उपचार शुरू होने से पहले ही उसकी सफलता की संभावना कम हो जाती है।

टेस्टोस्टेरॉन: वह कड़ी जो टूट रही है
इस त्रिकोण की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 'टेस्टोस्टेरॉन' हार्मोन है। डॉ. मधुलिका सिंह बताती हैं कि टाइप 2 डायबिटीज़ और मेटाबॉलिक सिंड्रोम वाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर कम होना एक आम समस्या है। टेस्टोस्टेरॉन केवल यौन इच्छा (Libido) के लिए ही नहीं, बल्कि अंडकोष के भीतर शुक्राणु बनने की प्रक्रिया (Spermatogenesis) के लिए भी अनिवार्य है।

जब टेस्टोस्टेरॉन का स्तर गिरता है, तो यह पुरुष की शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को तो प्रभावित करता ही है, साथ ही फर्टिलिटी उपचार के लिए एक कमज़ोर आधार तैयार करता है। डॉक्टर के अनुसार, "अगर हार्मोनल संतुलन बिगड़ा हुआ है, तो दुनिया का सबसे उन्नत आईवीएफ उपचार भी मनचाहा परिणाम देने में संघर्ष कर सकता है।"

फर्टिलिटी केयर में नई सोच की आवश्यकता
आमतौर पर, जब कोई दंपत्ति संतान प्राप्ति के लिए विशेषज्ञ के पास पहुँचता है, तो पूरा ध्यान महिला की रिपोर्ट्स और पुरुष के केवल 'सीमेन एनालिसिस' पर होता है। डॉ. मधुलिका सिंह का मानना है कि यह दृष्टिकोण अधूरा है। उन्होंने इस त्रिकोण को पहचानने और सुधारने के लिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:

प्रारंभिक स्क्रीनिंग: डायबिटीज़ या प्री-डायबिटिक पुरुषों के लिए केवल वीर्य जाँच ही नहीं, बल्कि टेस्टोस्टेरॉन और मेटाबॉलिक प्रोफाइल की जाँच भी शुरुआत में ही होनी चाहिए।

मेटाबॉलिक अनुकूलन: दवाओं से पहले जीवनशैली में बदलाव जैसे संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन प्रबंधन के जरिए ब्लड शुगर को नियंत्रित करना चाहिए। इससे टेस्टोस्टेरॉन का स्तर प्राकृतिक रूप से बेहतर होता है।

शरीर की तैयारी: फर्टिलिटी उपचार को केवल एक 'प्रक्रिया' के रूप में नहीं, बल्कि शरीर को 'सर्वोत्तम स्थिति' में लाने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।

डॉ. मधुलिका सिंह ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि पिता बनने का सपना देख रहे पुरुषों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि उनकी आंतरिक सेहत ही उनके आने वाले कल की बुनियाद है। शुगर और हार्मोन का सही संतुलन न केवल उन्हें स्वस्थ रखेगा, बल्कि उनके माता-पिता बनने के सफर को भी आसान और सफल बनाएगा।

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