करोड़ों का राजस्व देने वाली जनता गंदगी के बीच क्यों? सिराथू तहसील में सरकारी दावों की पोल खोल रहे शौचालय
कौशाम्बी की सिराथू तहसील में लाखों की लागत से बने शौचालय गंदगी का केंद्र बने; फरियादी और अधिवक्ता परेशान।
कौशाम्बी। सरकार एक ओर 'स्वच्छ भारत मिशन' पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर कौशाम्बी की सिराथू तहसील का प्रशासन इस मुहिम को ठेंगा दिखा रहा है। तहसील परिसर में लाखों की लागत से बना शौचालय आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहाँ आने वाले हजारों फरियादियों और दिन भर बैठने वाले अधिवक्ताओं के लिए यह शौचालय सुविधा के बजाय 'बीमारी का घर' बन चुका है।
तहसील परिसर में रोजाना सैकड़ों महिलाएं और पुरुष अपनी फरियाद लेकर आते हैं। प्रशासन ने कागजों पर तो शौचालय की व्यवस्था कर दी, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहाँ गंदगी ने अपनी सीमाएं पार कर ली हैं। न तो शौचालय में सफाई की कोई व्यवस्था है और न ही पानी का इंतजाम। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी महिला फरियादियों और महिला अधिवक्ताओं को उठानी पड़ रही है, जिन्हें बुनियादी सुविधा के लिए भी भटकना पड़ता है।
हैरानी की बात यह है कि शौचालय के ठीक पास ही अधिवक्ताओं के चेंबर हैं। अधिवक्ता सुबह से शाम तक इसी दुर्गंध और गंदगी के बीच काम करने को मजबूर हैं। शौचालय के चारों ओर उगी लंबी घास और जमा कचरा मच्छरों के पनपने का मुख्य केंद्र बन गया है, जो किसी भी समय बड़ी बीमारी को दावत दे सकता है।
जनता के मन में अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या तहसील में बैठने वाले IAS और PCS रैंक के आला अधिकारी इस गंदगी से वाकिफ नहीं हैं? क्या वे कभी इस तरफ का रुख नहीं करते? तहसील से सरकार को करोड़ों का राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन जब बात बुनियादी सुविधाओं की आती है, तो जनता और अधिवक्ताओं के साथ ऐसा उपेक्षित व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
"गंदगी के कारण यहाँ बैठना दूभर हो गया है। प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति जस की तस है।" - स्थानीय अधिवक्ता
अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद उच्चाधिकारियों की नींद खुलती है या फिर तहसील परिसर में आने वाली जनता इसी तरह नारकीय स्थिति में रहने को मजबूर रहेगी।
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