आईवीएफ की सफलता: सिर्फ सप्लीमेंट्स खाना काफी नहीं, शरीर की अंदरूनी तैयारी भी है जरूरी

आईवीएफ सफलता के लिए सिर्फ सप्लीमेंट्स ही नहीं, बल्कि पाचन, थायरॉइड संतुलन और शरीर की अंदरूनी तैयारी भी बेहद जरूरी है

May 15, 2026 - 17:29
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आईवीएफ की सफलता: सिर्फ सप्लीमेंट्स खाना काफी नहीं, शरीर की अंदरूनी तैयारी भी है जरूरी

गोरखपुर : आईवीएफ की तैयारी में पोषण को अक्सर सप्लीमेंट से जोड़कर देखा जाता है। फोलिक एसिड, विटामिन डी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे सप्लीमेंट उपचार से पहले और दौरान महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कई दंपति इन्हें नियमित रूप से लेते भी हैं, खान-पान में सुधार करते हैं और दवाइयां समय पर लेते हैं। इसके बावजूद कई बार शरीर में जरूरी पोषक तत्वों का स्तर अपेक्षित रूप से नहीं बन पाता। ऐसे में सवाल केवल यह नहीं होता कि शरीर को क्या दिया जा रहा है, बल्कि यह भी होता है कि शरीर उसे कितनी अच्छी तरह अपना और उपयोग कर पा रहा है।

डॉ. आकृति गुप्ता, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, गोरखपुर का कहना है कि पोषक तत्व लेना और उनका शरीर में सही तरीके से उपयोग होना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। यह अंतर सामान्य जांचों में हमेशा स्पष्ट नहीं दिखता। पाचन तंत्र की स्थिति, थायरॉइड का संतुलन, शरीर में सूजन की प्रवृत्ति और लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव, ये सभी इस बात को प्रभावित कर सकते हैं कि पोषक तत्व शरीर द्वारा कितनी अच्छी तरह उपयोग किए जा रहे हैं। कई बार दंपति सही सप्लीमेंट लेते हैं, लेकिन शरीर उन्हें पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता। ऐसे में जरूरी स्तर पूरे नहीं हो पाते और यह बात अक्सर अनदेखी रह जाती है।

प्रजनन उपचार में इसका असर कई स्तरों पर देखा जा सकता है। अंडाणुओं का विकास, गर्भाशय की परत की तैयारी और भ्रूण का शुरुआती विकास, ये सभी प्रक्रियाएं शरीर की कोशिकाओं, हार्मोन और सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलन से जुड़ी होती हैं। अंडाणु की गुणवत्ता, हार्मोन संतुलन और इम्प्लांटेशन की प्रक्रिया के लिए जरूरी है कि शरीर में पोषक तत्व उपलब्ध भी हों और उनका सही उपयोग भी हो रहा हो। इसलिए आईवीएफ की तैयारी में केवल सप्लीमेंट की सूची देखना पर्याप्त नहीं है।

कई बार सप्लीमेंट लेने के बावजूद कमी बनी रह सकती है। इसका कारण केवल खान-पान की कमी नहीं, बल्कि शरीर के अंदर पोषक तत्वों के उपयोग से जुड़ी चुनौतियां भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, अगर पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर रहा है या शरीर में लगातार सूजन की स्थिति बनी हुई है, तो लिए गए पोषक तत्वों का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इसी तरह थायरॉइड या अन्य हार्मोनल असंतुलन भी शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों और उपयोग की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

पाचन तंत्र और आंतों का माइक्रोबायोम भी इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पोषक तत्वों के उपयोग, पाचन और शरीर में सूजन के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं। इन सभी का संबंध प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ता है। इस क्षेत्र में चिकित्सा शोध लगातार आगे बढ़ रहा है और अब फर्टिलिटी मूल्यांकन में शरीर की अंदरूनी स्थिति को अधिक गंभीरता से समझा जा रहा है।

आईवीएफ की तैयारी कर रहे दंपति के लिए इसका मतलब यह है कि पोषण को केवल सप्लीमेंट लेने तक सीमित नहीं देखना चाहिए। शरीर में विटामिन डी, आयरन, फोलेट और अन्य जरूरी पोषक तत्वों के वास्तविक स्तर को समझना भी उतना ही जरूरी है। साथ ही, उन कारणों की पहचान भी जरूरी है जो इनके उपयोग को प्रभावित कर सकते हैं। पाचन से जुड़ी समस्याएं, थायरॉइड असंतुलन, तनाव, वजन और जीवनशैली से जुड़े कारक कई बार उपचार की तैयारी पर असर डालते हैं।

समय पर जांच और सही मूल्यांकन से डॉक्टर यह समझ पाते हैं कि दंपति को केवल सप्लीमेंट की जरूरत है या शरीर की अंदरूनी तैयारी को भी बेहतर करने की आवश्यकता है। इससे उपचार की तैयारी अधिक व्यक्तिगत और व्यवस्थित बनती है। हर दंपति की जरूरत अलग होती है, इसलिए आईवीएफ की तैयारी भी केवल एक जैसी सलाह पर आधारित नहीं हो सकती।

आईवीएफ में सप्लीमेंट लेना जरूरी हो सकता है, लेकिन उतना ही जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि शरीर उन्हें सही तरीके से अपना और उपयोग कर पा रहा है। जब पोषण, पाचन, हार्मोन और शरीर की अंदरूनी स्थिति को साथ में देखा जाता है, तभी उपचार की तैयारी अधिक संतुलित और प्रभावी बनती है।

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