बढ़ती उम्र ही नहीं, आपकी ये आदतें भी तय करती हैं अंडाणुओं की गुणवत्ता: फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स का खुलासा
महिलाओं में अंडाणुओं की गुणवत्ता सुधारने और फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए जरूरी लाइफस्टाइल बदलावों पर विशेषज्ञों की खास सलाह
प्रयागराज : फर्टिलिटी जांच के दौरान कई महिलाओं को “अंडाणुओं की गुणवत्ता” के बारे में बताया जाता है, लेकिन यह एक ऐसा विषय है जिसे लेकर अक्सर भ्रम बना रहता है। उम्र अंडाणुओं की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। हालांकि, शरीर का समग्र स्वास्थ्य भी प्रजनन क्षमता में अहम भूमिका निभाता है।
डॉ. वर्षा सैमसन रॉय, हेड ऑफ एम्ब्रायोलॉजी, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ और डॉ. मधुलिका सिंह, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, प्रयागराज का कहना है कि अंडाणुओं की सेहत इस बात से भी जुड़ी होती है कि शरीर के भीतर का वातावरण कैसा है। हार्मोन संतुलित हैं या नहीं, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य कैसा है, नींद पूरी हो रही है या नहीं, तनाव लंबे समय से बना हुआ है या नहीं और रोजमर्रा की आदतें कैसी हैं। इसलिए फर्टिलिटी को केवल उम्र से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
कुछ संकेत यह बता सकते हैं कि शरीर को अतिरिक्त ध्यान की जरूरत है। जैसे मासिक चक्र का अनियमित होना, लंबे समय तक तनाव बने रहना, लगातार कम नींद होना, इंसुलिन रेजिस्टेंस, पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम, पीएमओएस, धूम्रपान की आदत या ब्लड शुगर का असंतुलित रहना। पीएमओएस, पीसीओएस के लिए इस्तेमाल किया जा रहा नया चिकित्सकीय नाम है। इनका मतलब यह नहीं है कि अंडाणुओं की गुणवत्ता निश्चित रूप से प्रभावित हो चुकी है, लेकिन ये संकेत बताते हैं कि शरीर फर्टिलिटी के लिए पूरी तरह अनुकूल स्थिति में नहीं हो सकता।
लगातार तनाव का असर फर्टिलिटी पर पड़ सकता है
लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ा रह सकता है। इसका असर हार्मोन संतुलन, ओव्यूलेशन और अंडाणुओं के विकास की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। लगातार तनाव शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस भी बढ़ा सकता है, जिसे कोशिकाओं के स्वास्थ्य और फर्टिलिटी से जुड़े कारकों में महत्वपूर्ण माना जाता है।
नींद और फर्टिलिटी का गहरा संबंध है
नींद को अक्सर फर्टिलिटी से जोड़कर नहीं देखा जाता, जबकि शरीर के प्रजनन हार्मोन एक तय जैविक लय के अनुसार काम करते हैं। अगर नींद बार-बार टूटती है, रोज पर्याप्त नींद नहीं मिलती या लंबे समय तक रात की शिफ्ट में काम करना पड़ता है, तो यह लय प्रभावित हो सकती है। कुछ महिलाओं में मासिक चक्र का अनियमित होना इसका एक संकेत हो सकता है।
मेटाबॉलिक स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
कुछ संकेत यह बता सकते हैं कि शरीर को अतिरिक्त ध्यान की जरूरत है। जैसे मासिक चक्र का अनियमित होना, लंबे समय तक तनाव बने रहना, लगातार कम नींद होना, इंसुलिन रेजिस्टेंस, पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम, पीएमओएस, जो पीसीओएस के लिए इस्तेमाल किया जा रहा नया चिकित्सकीय नाम है, धूम्रपान की आदत या ब्लड शुगर का असंतुलित रहना। इनका मतलब यह नहीं है कि अंडाणुओं की गुणवत्ता निश्चित रूप से प्रभावित हो चुकी है, लेकिन ये संकेत बताते हैं कि शरीर फर्टिलिटी के लिए पूरी तरह अनुकूल स्थिति में नहीं हो सकता।
धूम्रपान और शराब से दूरी रखना फायदेमंद है
धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर धूम्रपान अंडाशय की कार्यक्षमता और अंडाणुओं के भंडार पर नकारात्मक असर डाल सकता है। अगर गर्भधारण की योजना है या फर्टिलिटी उपचार चल रहा है, तो इन आदतों से दूरी रखना बेहतर है।
संतुलित खानपान शरीर को बेहतर सहारा देता है
कोई एक आहार अंडाणुओं की गुणवत्ता को तुरंत नहीं बदल सकता। लेकिन संतुलित खानपान शरीर को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। ताजे फल, हरी सब्जियां, पर्याप्त प्रोटीन, स्वस्थ वसा, विटामिन और जरूरी पोषक तत्व कोशिकाओं के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक होते हैं। अंडाणुओं के विकास के लिए शरीर को ऊर्जा, हार्मोन संतुलन और कोशिकीय सुरक्षा, तीनों की जरूरत होती है।
एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स के संपर्क को कम करें
एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स, जो आमतौर पर प्लास्टिक, फूड पैकेजिंग, कॉस्मेटिक्स और अन्य पर्सनल केयर उत्पादों में पाए जाते हैं, शरीर के हार्मोन संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। शोध बताते हैं कि लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से फॉलिकल के विकास और अंडाणुओं की परिपक्वता पर असर पड़ सकता है। साथ ही, यह अंडाणुओं में क्रोमोसोमल असामान्यताओं और ओवेरियन रिजर्व के तेजी से कम होने से भी जुड़ा हो सकता है। इसलिए रोजमर्रा के जीवन में इन रसायनों के संपर्क को कम करने पर ध्यान देना प्रजनन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है।
समय रहते सही कदम उठाना जरूरी है
अंडाणुओं की गुणवत्ता रातोंरात नहीं बदलती। यह लंबे समय तक शरीर के भीतर चल रही प्रक्रियाओं, उम्र, स्वास्थ्य स्थितियों और जीवनशैली से जुड़ी आदतों से प्रभावित होती है। तनाव, पर्याप्त नींद, संतुलित पोषण और बेहतर मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के साथ-साथ एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स जैसे पर्यावरणीय कारकों के संपर्क पर ध्यान देना भी आधुनिक फर्टिलिटी देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। इसलिए अगर गर्भधारण की योजना बन रही है या फर्टिलिटी उपचार के बारे में सोच रहे हैं, तो समय पर जांच, जीवनशैली में सुधार और सही चिकित्सकीय सलाह बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकती है।
फर्टिलिटी को केवल एक रिपोर्ट या उम्र से समझना पर्याप्त नहीं है। यह शरीर के समग्र स्वास्थ्य, सही समय पर जांच और विशेषज्ञ सलाह से जुड़ा विषय है। इसलिए अंडाणुओं की गुणवत्ता को लेकर चिंता होने पर स्वयं निष्कर्ष निकालने के बजाय फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से सलाह लेना सबसे सही कदम है।
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