क्या 'पेड्डी' बनेगी राम चरण के करियर की सबसे ऐतिहासिक फिल्म?

मेगा पावर स्टार राम चरण फिल्म 'पेड्डी' से 'लोकनायक' बनने की राह पर, जानिए क्यों यह उनके करियर का सबसे बड़ा बदलाव है

May 22, 2026 - 15:05
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क्या 'पेड्डी' बनेगी राम चरण के करियर की सबसे ऐतिहासिक फिल्म?

साउथ सिनेमा के 'मेगा पावर स्टार' राम चरण हमेशा से अपनी भव्य फिल्मों और लार्जर-देन-लाइफ किरदारों के लिए जाने जाते रहे हैं। Chirutha से लेकर Magadheera की ऐतिहासिक सफलता और हाल ही में RRR के जरिए वैश्विक स्तर पर अल्लूरी सीताराम राजू के रूप में चमकने वाले राम चरण की पहचान एक अर्बन और स्टाइलिश स्टार की रही है। लेकिन, बुच्ची बाबू सना के निर्देशन में आ रही उनकी आगामी स्पोर्ट्स-एक्शन ड्रामा फिल्म 'पेड्डी' (Peddi) उनके इस स्टारडम को एक नया आयाम देने के लिए तैयार है।

4 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही 'पेड्डी', राम चरण को किसी चमकीले पैन-इंडिया स्पेक्टेकल के बजाय मिट्टी, पसीने, मेहनत और ग्रामीण संघर्ष की एक बेहद रॉ (Raw) दुनिया में ले जाती है। फिल्म के हालिया प्रमोशनल मटेरियल और ट्रेलर में उनका संतुलित लुक पूरी तरह गायब है। लंबे बाल, आंखों में गहरी थकान, चेहरे पर संघर्ष के निशान और एक ठेठ ग्रामीण खिलाड़ी या पहलवान जैसी काया यह साफ करती है कि राम चरण ने इस किरदार के लिए अपनी स्थापित स्टार इमेज को पूरी तरह किनारे रख दिया है।

फिल्म के निर्देशक बुच्ची बाबू सना ने हाल ही में साझा किया, "पेड्डी एक ऐसी कहानी है जो सीधे दर्शकों के दिलों को छुएगी। राम चरण ने एक इतने बड़े वैश्विक सुपरस्टार होने के बावजूद अपने स्टारडम को अलग रखकर सिर्फ कहानी और किरदार पर ध्यान केंद्रित किया है।"

कई मायनों में यह फिल्म उनकी 2018 की ब्लॉकबस्टर Rangasthalam की याद दिलाती है, जिसने राम चरण के भीतर की संवेदनशीलता को पहली बार दुनिया के सामने लाया था। हालांकि, 'रंगस्थलम' की तुलना में 'पेड्डी' की दुनिया कहीं अधिक कठोर, हिंसक और भारी महसूस होती है। यह फिल्म ग्रामीण खेल संस्कृति, मर्दाना स्वाभिमान और जीवित रहने की जमीनी लड़ाई पर आधारित है, जिसमें दिल्ली के बैकड्रॉप से जुड़ा एक बड़ा इमोशनल ट्विस्ट भी दर्शकों को देखने को मिलेगा।

तेलुगु सिनेमा के पारंपरिक "मेगा हीरो" अक्सर स्क्रीन पर आम जनता से काफी दूर, सपनों जैसे लगते हैं। लेकिन 'पेड्डी' के जरिए राम चरण 'लोकनायक' बनने की राह पर हैं। यह फिल्म उन्हें केवल थिएटर की अगली कतारों में तालियां बजाने वाले फैंस का सुपरस्टार नहीं, बल्कि आम जनता के अपने संघर्षों और आत्मसम्मान का प्रतीक बनाने का माद्दा रखती है।

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