कौशाम्बी मेडिकल कॉलेज बना 'मौत का अड्डा'? पिता की मौत पर बेटी का फूटा गुस्सा, कहा— 'डॉक्टर सोते रहे और दम तोड़ दिया'
कौशाम्बी मेडिकल कॉलेज में इलाज के अभाव में बुजुर्ग की मौत; बेटी ने डॉक्टरों पर लगाया इंजेक्शन और लापरवाही का गंभीर आरोप।
(एडवोकेट अजय पंडा / ब्यूरो)
कौशाम्बी : जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। शनिवार को मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान एक बुजुर्ग की मौत के बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। मृतक की बेटी ने डॉक्टरों और स्टाफ पर इलाज में घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का संगीन आरोप लगाते हुए अस्पताल की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया है।
"इंजेक्शन लगाते रहे, इलाज नहीं किया"
रोती-बिलखती पीड़ित बेटी का आरोप है कि उसके पिता की हालत बिगड़ रही थी, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक सो रहे थे। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद किसी ने सुध नहीं ली। बेटी ने रोते हुए बताया, "मैंने गिड़गिड़ाकर कहा था कि अगर यहां सुधार नहीं हो रहा है, तो इलाज बंद कर दो और हमें रेफर कर दो, ताकि हम कहीं और जान बचा सकें। लेकिन स्टाफ ने एक न सुनी और केवल इंजेक्शन पर इंजेक्शन लगाते रहे।"
परिजनों का आरोप है कि सही इलाज के अभाव और डॉक्टरों की गैरमौजूदगी के कारण वृद्ध ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
क्या जांच केवल कागजों तक सीमित?
यह कोई पहला मामला नहीं है जब कौशाम्बी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों पर इस तरह के गंभीर आरोप लगे हों। स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि आए दिन अस्पताल में मरीजों के साथ बदसलूकी और लापरवाही की खबरें आती हैं, लेकिन विभागीय जांच और कार्रवाई केवल 'कमीशन' और खानापूर्ति तक ही सीमित रह जाती है। अस्पताल की इस अराजकता से आम जनता में भारी आक्रोश है।
उठते सवाल: अस्पताल या अत्याचार का केंद्र?
- बेटी के इन आरोपों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कलई खोल दी है:
- क्या आपातकालीन स्थिति में भी डॉक्टर वार्डों से नदारद रहते हैं?
- गंभीर मरीज को समय पर रेफर क्यों नहीं किया गया?
- क्या सरकारी अस्पताल अब केवल मौत का अड्डा बनकर रह गए हैं?
इस हृदयविदारक घटना के बाद अब देखना यह होगा कि क्या उच्च अधिकारी इस मामले में डॉक्टरों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाते हैं, या फिर इस बार भी जांच की फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी।
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