"प्रकृति और भक्ति का अनूठा संगम: वास्तु शास्त्री डॉ. सुमित्रा से जानिए कैसे मनाएं इस बार 'हरित शिवरात्रि'"
महाशिवरात्रि एक आध्यात्मिक और पर्यावरण से गहराई से जुड़ा पर्व है। भगवान शिव को पशुपतिनाथ (सभी जीवों के स्वामी) और प्रकृति के रक्षक के रूप में जाना जाता है। उनकी पूजा में बेलपत्र, धतूरा, आक जैसे प्राकृतिक तत्वों का उपयोग होता है, जो हमें प्रकृति के प्रति सम्मान सिखाते हैं। इसलिए पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए महाशिवरात्रि मनाना न केवल धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि शिवत्व की सच्ची साधना भी है।
पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाते हुए, पर्यावरण अनुकूल तरीके से महाशिवरात्रि मनाएं।
पूजा सामग्री प्राकृतिक और न्यूनतम रखें
बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, शमी पत्र, तुलसी, चंदन, हल्दी आदि प्राकृतिक चीजें इस्तेमाल करें।
फूलों की माला या गजरा ताजा और स्थानीय बाजार से लें (प्लास्टिक की माला या सिंथेटिक फूल बिल्कुल न लें)।
अभिषेक के लिए कम दूध इस्तेमाल करें (या दूध की जगह गंगाजल/शुद्ध जल) – क्योंकि मंदिरों में लाखों लीटर दूध बहने से नदियां प्रदूषित होती हैं।
दीपक और सजावट पर्यावरण अनुकूल
मिट्टी के दीये इस्तेमाल करें।
सजावट में ताजा फूल, पत्ते, रंगोली (प्राकृतिक रंगों से), मिट्टी के बर्तन या लकड़ी के सामान का उपयोग करें।
प्लास्टिक की मालाएं, थर्मोकोल, सिंथेटिक झंडे बिल्कुल न लगाएं।
प्रसाद और भोजन
घर पर बनाया हुआ सात्विक फलाहार (फल, दूध, मखाना, साबूदाना) प्रसाद के रूप में बांटें।
लंगर/भंडारे में स्टील के बर्तन, बांस/पत्ते के प्लेट या बायोडिग्रेडेबल सामान इस्तेमाल करें – प्लास्टिक/डिस्पोजेबल प्लेट, ग्लास, चम्मच न दें।
पैकेज्ड प्रसाद (प्लास्टिक में लिपटा) से बचें।
फूलों और पूजा सामग्री का निपटान
पूजा के बाद फूलों को नदी/नाले में न फेंकें – इससे जल प्रदूषण होता है।
फूलों को कम्पोस्ट करें या किसी मंदिर के फ्लोरल वेस्ट रिसाइक्लिंग प्रोग्राम में दें।
बेलपत्र आदि को पेड़ के नीचे रखकर प्रकृति को लौटाएं।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संकल्प लें
एक पौधा लगाएं (बेल, पीपल, शमी या कोई फलदार पेड़) – यह शिव को सबसे प्रिय अर्पण है।
प्लास्टिक मुक्त संकल्प लें – घर में क्लॉथ बैग, स्टील बोतल इस्तेमाल करें।
स्वच्छता अभियान में हिस्सा लें – मंदिर या घर के आसपास सफाई करें।
पानी बचाएं – अभिषेक में कम पानी इस्तेमाल करें और बचा पानी पौधों में डालें।
महाशिवरात्रि पर शिव और प्रकृति दोनों की रक्षा का संकल्प लें – क्योंकि शिव ही प्रकृति हैं। इस तरह मनाने से आपकी भक्ति भी सार्थक होगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
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डॉ सुमित्रा अग्रवाल
सेलिब्रिटी वास्तु शास्त्री
कोलकाता , यूट्यूब वास्तुसुमित्रा
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