99% स्वदेशी, 11 हजार से ज्यादा इंजन: बनारस रेल इंजन कारखाने ने रचा इतिहास, विदेशी धरती पर भी दौड़ रही 'बरेका' की रफ्तार
वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेड इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को सच करते हुए बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) ने एक नया इतिहास रच दिया है। कभी इंजनों के कलपुर्जों के लिए विदेशों पर निर्भर रहने वाला यह कारखाना अब लगभग 99 प्रतिशत स्वदेशीकरण हासिल कर चुका है। स्थापना के बाद से अब तक बरेका 11,000 से अधिक रेल इंजनों का निर्माण कर चुका है, जो न केवल भारतीय रेलवे की रीढ़ बने हैं, बल्कि अफ्रीका और श्रीलंका समेत दुनिया के 11 देशों की पटरियों पर भी धड़ाधड़ दौड़ रहे हैं।
- राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने रखी थी नींव
बनारस रेल इंजन कारखाना (BLW) का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है: - शुरुआत: इसकी आधारशिला 23 अप्रैल 1956 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा रखी गई थी।
- औपचारिक अस्तित्व: अगस्त 1961 में यह पूरी तरह अस्तित्व में आया।
- पहला इंजन: कारखाने से पहला रेल इंजन 03 जनवरी 1964 को बनकर बाहर निकला था।
बरेका के जन संपर्क अधिकारी राजेश कुमार के अनुसार, पिछला वित्तीय वर्ष (2025-26) इस कारखाने के लिए ऐतिहासिक रहा। इस दौरान बरेका ने करीब 20 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज करते हुए रिकॉर्ड 572 लोकोमोटिव का निर्माण किया। यानी यहाँ औसतन प्रतिदिन 1.9 इंजन तैयार किए जा रहे हैं। अब तक कुल इंजनों का आंकड़ा 11,259 तक पहुंच चुका है।
बरेका न केवल देश की जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान मजबूत कर चुका है।
अब तक बरेका द्वारा निर्मित लगभग 182 डीजल लोकोमोटिव 11 देशों में निर्यात किए जा चुके हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में ही 10 लोकोमोटिव अफ्रीकी देश मोजाम्बिक भेजे गए थे।
रेलवे की आधुनिक और महत्वाकांक्षी 'अमृत भारत' गाड़ियों के लिए भी बरेका तेजी से काम कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में यहाँ 14 अमृत भारत लोकोमोटिव बनकर तैयार हुए। कारखाने की इसी बेहतरीन क्षमता को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बरेका को 166 नए लोकोमोटिव बनाने का बंपर ऑर्डर दिया है।
| वर्ष/अवधि | ऐतिहासिक उपलब्धि |
| 2016-17 व 2017-18 | रेल मंत्रालय द्वारा लगातार सर्वश्रेष्ठ उत्पादन इकाई का पुरस्कार। |
| 2018 | दो पुराने डीजल इंजनों को सफलतापूर्वक इलेक्ट्रिक इंजन (WAG11) में बदला। |
| 2021-22 | एक साल में रिकॉर्ड 367 रेल इंजनों का उत्पादन। |
| 2023 | कारखाने से 10,000वें लोकोमोटिव का निर्माण पूरा हुआ। |
| 2025 | बरेका ने 11,000वें इंजन के निर्माण का ऐतिहासिक मील का पत्थर छुआ। |
साफ है कि 65 साल से भी पुराना यह रेल कारखाना आज आधुनिक तकनीक, स्वदेशी ताकत और बेजोड़ कार्यक्षमता के दम पर वैश्विक पटल पर भारतीय रेलवे का गौरव बढ़ा रहा है।
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