ऋषिकेश: 'वसुंधरा करुणा दीप पुरस्कार' से महका पूर्णानंद घाट, मानवता की सेवा के लिए नर्सें सम्मानित

ऋषिकेश के पूर्णानंद घाट पर अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर 'वसुंधरा करुणा दीप पुरस्कार' से नर्सिंग स्टाफ को सम्मानित किया गया

May 12, 2026 - 21:56
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ऋषिकेश: 'वसुंधरा करुणा दीप पुरस्कार' से महका पूर्णानंद घाट, मानवता की सेवा के लिए नर्सें सम्मानित

ऋषिकेश। देवभूमि ऋषिकेश के पावन पूर्णानंद घाट पर मंगलवार को मानवता की सेवा और समर्पण का एक अनूठा संगम देखने को मिला। 'अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस' के उपलक्ष्य में ऋषिकेश गंगा आरती ट्रस्ट और वसुंधरा संस्था द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली नर्सों को 'वसुंधरा करुणा दीप पुरस्कार' से नवाजा गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तराखंड मौन परिषद के उपाध्यक्ष गिरीश डोभाल ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने नर्सिंग पेशे की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक नर्स केवल चिकित्सक के निर्देशों का पालन नहीं करती, बल्कि वह मरीज के लिए आशा की किरण होती है।

डोभाल ने भावुक होते हुए कहा, "नर्सें कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराते हुए मरीजों को मानसिक संबल प्रदान करती हैं। विशेषकर कोरोना काल में उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना जिस त्याग और समर्पण का परिचय दिया, वह इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। उनका यह सेवा भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।"

सम्मान समारोह के दौरान वक्ताओं ने नर्सिंग को करुणा, धैर्य और अटूट सेवा का जीवंत उदाहरण बताया। इस अवसर पर पूर्णानंद घाट पर एक विशेष 'गंगा आरती' का आयोजन किया गया, जो विशेष रूप से नर्सिंग स्टाफ के स्वास्थ्य और मंगल की कामना के लिए समर्पित थी। गंगा की लहरों और मंत्रोच्चारण के बीच जब नर्सों को सम्मानित किया गया, तो वहां मौजूद जनसमूह ने करतल ध्वनि से उनका अभिवादन किया।

ऋषिकेश गंगा आरती ट्रस्ट के अध्यक्ष हरिओम शर्मा ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि समाज के इन असली नायकों का सम्मान करना संस्था के लिए गर्व की बात है। कार्यक्रम का कुशल संचालन वसुंधरा संस्था की उपाध्यक्ष ज्योति शर्मा द्वारा किया गया। उन्होंने नर्सिंग स्टाफ के योगदान को समाज के लिए अपरिहार्य बताया।

इस गरिमामयी कार्यक्रम ने न केवल नर्सों के मनोबल को बढ़ाया, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही ईश्वर की सच्ची पूजा है।

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