कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता सरकार को फटकार के साथ लगाया जुर्माना, सीमा सुरक्षा से जुड़े हलफनामे पर बरती थी ढिलाई
कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता सरकार पर लगाया 25 हजार का जुर्माना; भारत-बांग्लादेश सीमा सीलिंग मामले में बरती लापरवाही
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। भारत-बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह सील करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने के मामले में संतोषजनक जवाब न देने और विस्तृत हलफनामा दाखिल न करने पर अदालत ने राज्य सरकार पर जुर्माना ठोक दिया है।
25 हजार रुपये का जुर्माना और फटकार
अदालत ने कानून एवं कानून प्रवर्तन विभाग के संयुक्त निदेशक पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्यवाही इसलिए की गई क्योंकि सरकार ने 31 मार्च 2026 की समय सीमा समाप्त होने के बावजूद विस्तृत हलफनामे के बजाय केवल एक संक्षिप्त रिपोर्ट पेश की थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जुर्माने की यह राशि 15 दिनों के भीतर स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी में जमा करानी होगी।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है मामला
अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सीमा सुरक्षा (National Security) जैसे संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई 2,216.7 किलोमीटर है। सीमा पर बाड़बंदी का काम लंबे समय से लंबित है, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी कोर्ट ने मांगी थी।
दो हफ्ते की अंतिम मोहलत
हाईकोर्ट ने ममता सरकार को दो हफ्ते का और समय दिया है। इस अवधि के भीतर राज्य सरकार को नया और विस्तृत हलफनामा दाखिल करना होगा, जिसमें निम्नलिखित जानकारियां स्पष्ट करनी होंगी:
- सीमा को प्रभावी ढंग से सील करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
- बाड़बंदी के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया वर्तमान में किस स्तर पर है?
जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह सख्त रुख केंद्र और राज्य के बीच सीमा प्रबंधन को लेकर चल रहे विवादों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बंगाल सरकार इस बार तय समय सीमा में कोर्ट के निर्देशों का पालन करती है या नहीं।
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