ट्रंप का 'मिशन होर्मुज': क्या ईरान के साथ आर-पार की जंग दुनिया को ले डूबेगी?
ट्रंप की होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉकेड की धमकी से वैश्विक तेल सप्लाई ठप होने का डर। जानें अर्थव्यवस्था पर इसका असर
नई दिल्ली। इस्लामाबाद शांति वार्ता की नाकामी ने पश्चिम एशिया में बारूद की गंध और तेज कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो अपने सख्त फैसलों के लिए जाने जाते हैं, अब एक ऐसे दोराहे पर खड़े हैं जहां उनका एक कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ब्लॉक करने की ट्रंप की ताजा धमकी ने न केवल तेहरान, बल्कि पूरी दुनिया के बाजारों में हड़कंप मचा दिया है।
क्यों खास है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट महज एक समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि दुनिया की 'ऊर्जा धमनी' है। वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी नौसेना इस चोकपॉइंट को पूरी तरह सील कर देगी। साथ ही, उन्होंने उन देशों को भी चेतावनी दी है जिन्होंने ईरान को 'अवैध टोल टैक्स' चुकाया है—उन्हें इस रास्ते के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाएगी।
चौतरफा दबाव में व्हाइट हाउस
- ट्रंप इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहे हैं:
- ईरान का दबदबा खत्म करना: ट्रंप चाहते हैं कि ईरान आर्थिक रूप से घुटने टेक दे।
घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्था: यदि होर्मुज ब्लॉक होता है, तो तेल की कीमतें आसमान छुएंगी। इससे अमेरिका में महंगाई बढ़ेगी, जो खुद ट्रंप के लिए राजनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह 'प्रेशर टैक्टिक्स' ट्रंप पर ही भारी पड़ सकती है। उनके इस कदम से न केवल चीन और भारत जैसे बड़े आयातक प्रभावित होंगे, बल्कि यूरोपीय सहयोगियों के साथ भी अमेरिका के रिश्ते तल्ख हो सकते हैं। इस्लामाबाद में बातचीत का बेनतीजा रहना यह संकेत है कि कूटनीति के दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं और अब गेंद पूरी तरह सैन्य शक्ति के पाले में है।
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