विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड पर टैक्स खत्म
सरकार ने अध्यादेश जारी कर विदेशी संस्थागत निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों पर कैपिटल गेन्स टैक्स से छूट दी है।
नई दिल्ली: देश में विदेशी मुद्रा (डॉलर) के प्रवाह को बढ़ाने और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होते रुपये को मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026' को मंजूरी दे दी। इस अध्यादेश के तहत अब विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs या सरकारी बॉन्ड) में निवेश से होने वाली ब्याज आय और कैपिटल गेन्स टैक्स (पूंजीगत लाभ कर) से पूरी तरह छूट दे दी गई है।
यह नियम 1 अप्रैल 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospectively) से लागू माना जाएगा। क्या है इस फैसले का मतलब?अब तक विदेशी निवेशकों को भारतीय सरकारी बॉन्ड से होने वाली ब्याज आय पर 20 प्रतिशत का विदहोल्डिंग टैक्स और 12 महीने से अधिक समय तक बॉन्ड रखने के बाद बेचने पर 12.5 प्रतिशत का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स देना पड़ता था। इस अध्यादेश के बाद यह दोनों टैक्स पूरी तरह खत्म हो जाएंगे।
हालांकि, इस टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए विदेशी निवेशकों को टैक्स अधिकारियों के समक्ष निर्धारित जानकारी और दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। क्यों लिया गया यह फैसला?वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितताओं के कारण इस साल (2026 में) विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार (इक्विटी) से करीब 2.6 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम निकाली है, जिससे भारतीय रुपये पर भारी दबाव बना हुआ है। इस फैसले के जरिए सरकार का लक्ष्य दुनिया भर के बड़े पेंशन फंड, बीमा कंपनियों और सॉवेरेन वेल्थ फंड के रूप में 'लॉन्ग-टर्म और सुरक्षित' विदेशी पूंजी को भारत की तरफ आकर्षित करना है।
टैक्स छूट के इस बड़े फैसले के साथ ही रिजर्व बैंक (RBI) ने भी विदेशी निवेशकों के लिए 15, 30 और 40 साल के नए सॉवेरेन बॉन्ड के रास्ते खोल दिए हैं, जिससे सरकार को कम ब्याज दरों पर कर्ज जुटाने में मदद मिलेगी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)