अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ा सुखधरनपुर का सामुदायिक केंद्र, ग्रामीणों ने खोली पोल
कौशाम्बी के सुखधरनपुर में सामुदायिक केंद्र बना 'भूसा घर'; खिड़कियाँ टूटी, पंखे गायब। अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
कौशाम्बी (सिराथू)। उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर सरकारी इमारतों की हालत विभागीय अनदेखी के कारण बद से बदतर होती जा रही है। ताज़ा मामला विकास खंड कड़ा के थुलगुला ग्राम पंचायत के मजरा सुखधरनपुर किठाव का है, जहाँ बना सामुदायिक केंद्र अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है।
कभी ग्रामीणों की सुविधा के लिए बना यह सामुदायिक केंद्र अब असामाजिक तत्वों और अतिक्रमणकारियों का अड्डा बन चुका है। केंद्र की खिड़कियाँ पूरी तरह टूट चुकी हैं और मुख्य गेट आधा उखड़कर लटका हुआ है। सबसे हैरानी की बात यह है कि सरकारी भवन के भीतर वर्षों से भूसा भरा हुआ है। भवन का प्लास्टर उधड़ चुका है, बिजली के पंखे गायब हैं और चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा है। हालत ऐसी है कि स्थानीय लोगों की जगह यहाँ बाहरी लोग डेरा डाले हुए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस दुर्दशा की शिकायत कई बार ग्राम प्रधान, सचिव और खंड विकास अधिकारी (BDO) से की जा चुकी है। यहाँ तक कि नोडल अधिकारी को भी मामले से अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। अधिकारियों की इस रहस्यमयी चुप्पी ने अब "गोलमाल" की आशंका को जन्म दे दिया है। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या सरकारी इमारतें इसी तरह ढहने के लिए छोड़ दी गई हैं? क्या सामुदायिक केंद्र अब गाय-बकरी पालने और भूसा रखने के काम आएंगे?
प्रेस के माध्यम से ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों से इस सामुदायिक केंद्र को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराने और मरम्मत कराने की गुहार लगाई है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर यह सरकारी इमारत भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़कर ज़मींदोज़ हो जाएगी।
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