भारतीय कूटनीति अब और भी सशक्त: 'हेड्स ऑफ मिशन्स' सम्मेलन में डॉ. एस. जयशंकर का बड़ा बयान
डॉ. जयशंकर ने 11वें 'हेड्स ऑफ मिशन्स' सम्मेलन में भारतीय कूटनीति को सराहा। राष्ट्रीय हितों और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा।
नई दिल्ली। वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती धमक और कूटनीतिक कौशल को रेखांकित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 11वें 'हेड्स ऑफ मिशन्स' सम्मेलन को संबोधित किया। नई दिल्ली में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में विश्व भर में तैनात भारतीय राजदूतों और उच्चायुक्तों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय कूटनीति आज किसी भी वैश्विक चुनौती का सामना करने और राष्ट्रीय लक्ष्यों को सुरक्षित करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
दशक भर की कूटनीतिक प्रगति का रिपोर्ट कार्ड
विदेश मंत्री ने पिछले 10 वर्षों के दौरान वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव और सक्रिय जुड़ाव की सराहना की। उन्होंने सोशल मीडिया (एक्स) पर अपनी बात साझा करते हुए कहा, "आज की अस्थिर और अशांत दुनिया में भारतीय कूटनीति न केवल राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ा रही है, बल्कि भविष्य के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए तत्पर है।" यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों से जूझ रही है।
बदलते वैश्विक समीकरण और सुरक्षा चुनौतियाँ
डॉ. जयशंकर ने भारतीय राजनयिकों को बदलते शक्ति संतुलन के प्रति सतर्क रहने और निम्नलिखित मुद्दों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया:
- युद्ध और संघर्ष: रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव का विश्लेषण।
- रणनीतिक मार्ग: होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा।
- क्षेत्रीय प्रभाव: पूर्वी एशिया में चीन की बढ़ती गतिविधियों और भारत की जवाबी रणनीति।
शीर्ष नेतृत्व का मिलेगा मार्गदर्शन
सम्मेलन के आगामी सत्रों में रक्षा रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा के लिए सीडीएस जनरल अनिल चौहान और एनएसए अजीत डोभाल का संबोधन होगा। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ होगा, जहाँ वे विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप देश की विदेश नीति का आगामी रोडमैप साझा करेंगे।
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