श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन महाराजपुर में उमड़ा जनसैलाब, जयकारों से गूंजा पंडाल
महाराजपुर में श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर उमड़ा जनसैलाब; श्रीकृष्ण की लीलाओं को सुन भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु
(आदर्श भारतीय)
कुंडा-बाघराय। बिहार विकास खंड क्षेत्र के महाराजपुर ग्रामसभा में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन मंगलवार को हुआ। कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया कि आज भी ग्रामीण अंचलों में अध्यात्म और भक्ति की जड़ें बेहद गहरी हैं। समूचा कथा पंडाल सुबह से ही दूर-दराज के गांवों से आए भक्तों से खचाखच भर गया था।
व्यास पीठ से कथा वाचक आचार्य आदित्य कृष्ण महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं, अधर्म के विनाश हेतु धर्म स्थापना और मानव कल्याण के लिए उनके द्वारा दिए गए संदेशों का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मनुष्य को सत्य, प्रेम और निस्वार्थ सेवा का मार्ग दिखाने वाली जीवन पद्धति है।
आचार्य ने बल देते हुए कहा, "कलियुग में केवल भगवान का नाम ही पर्याप्त है। जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक भागवत महापुराण का श्रवण करता है, उसके न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।"
कथा के दौरान जब भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक झांकियों और लीलाओं का प्रसंग आया, तो श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। पूरा वातावरण "राधे-राधे" और "जय श्रीकृष्ण" के जयघोष से गुंजायमान हो गया। भजनों की धुन पर भक्तों के कदम खुद-ब-खुद थिरकने लगे, जिससे पंडाल पूरी तरह भक्ति रस में सराबोर नजर आया।
इस धार्मिक अनुष्ठान के सफल आयोजन में यजमान बैजनाथ तिवारी और मुन्नी देवी का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के आयोजक भूपेंद्र तिवारी सहित रोहित पांडे, अंकित शुक्ला, बब्बन शुक्ला और लवलेश शुक्ला ने व्यवस्थाओं को संभाला। अंतिम दिन की आरती के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
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