कौशाम्बी: यमुना की कोख छलनी कर रहे बालू माफिया, NGT के नियमों को ताक पर रख जलधारा में गरज रहीं मशीनें
कौशाम्बी के रसूलपुर ब्यूर घाट पर यमुना की जलधारा में अवैध खनन। NGT नियमों की धज्जियां उड़ा रहे बालू माफिया।
(एडवोकेट अजय पंडा / ब्यूरो)
कौशाम्बी। उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में बालू माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्हें न तो कानून का खौफ है और न ही एनजीटी (NGT) के कड़े निर्देशों की परवाह। ताजा मामला पिपरी थाना क्षेत्र के रसूलपुर ब्यूर घाट का है, जहाँ यमुना नदी की मुख्य जलधारा के बीचों-बीच पोकलैंड मशीनें उतारकर अवैध खनन का खुला खेल खेला जा रहा है। सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति यहाँ के रेत के टीलों में दबी नजर आ रही है।
स्थानीय स्तर पर वायरल हो रहे वीडियो और ग्रामीणों की शिकायतों के अनुसार, रसूलपुर ब्यूर घाट पर आधा दर्जन से अधिक पोकलैंड मशीनें दिन-रात नदी का सीना चीर रही हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का स्पष्ट आदेश है कि नदी की जलधारा को बाधित नहीं किया जाएगा और मशीनों से खनन प्रतिबंधित रहेगा। बावजूद इसके, माफियाओं ने नदी के प्रतिबंधित क्षेत्रों में गहरी खुदाई कर 20-25 फीट तक के जानलेवा गड्ढे बना दिए हैं।
अवैध खनन के इस बड़े पैमाने के कारण यमुना की प्राकृतिक धारा बदलने का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अनियंत्रित खुदाई से कटान बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में बाढ़ की विभीषिका गंभीर रूप ले सकती है। वहीं, पानी के भीतर मशीनों के संचालन से जलीय जीवों और पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।
ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह काला कारोबार स्थानीय पुलिस और खनन विभाग की कथित सरपरस्ती में फल-फूल रहा है। माफियाओं का दबदबा इतना है कि शिकायत करने वालों को धमकियाँ दी जाती हैं। जीपीएस (GPS) निगरानी के दावों के बीच प्रतिबंधित क्षेत्र में मशीनों का चलना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है। रात के अंधेरे में सैकड़ों डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली अवैध बालू लेकर बेखौफ सड़कों पर दौड़ते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए खनन अधिकारी कौशाम्बी ने कहा है कि वीडियो के आधार पर जाँच टीम भेजी जा रही है। दोषी पाए जाने पर मशीनों को सीज कर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, पिपरी थाना पुलिस का कहना है कि खनन विभाग की रिपोर्ट प्राप्त होते ही मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इन रसूखदार बालू माफियाओं पर नकेल कस पाता है या यमुना की जलधारा इसी तरह अवैध मशीनों की भेंट चढ़ती रहेगी।
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