कुंडा: तहसीलदार के खिलाफ सातवें दिन भी गरजा अधिवक्ताओं का आक्रोश, आंदोलन उग्र करने की दी चेतावनी
कुंडा में तहसीलदार अलख शुक्ला के खिलाफ अधिवक्ताओं का प्रदर्शन सातवें दिन भी जारी; भ्रष्टाचार और तानाशाही के आरोप, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
(आदर्श भारतीय)
कुंडा (प्रतापगढ़)। कुंडा तहसील में तहसीलदार अलख शुक्ला के खिलाफ अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को आंदोलन के सातवें दिन ढाई सौ से अधिक अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया। 'दि बार एसोसिएशन' के बैनर तले अधिवक्ताओं ने तहसीलदार के स्थानांतरण की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की और स्पष्ट किया कि जब तक मांग पूरी नहीं होती, कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे बार एसोसिएशन के महामंत्री योगेश कुमार त्रिपाठी उर्फ योगी एडवोकेट ने तहसील प्रशासन पर तीखा हमला बोला। अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसीलदार अलख शुक्ला का रवैया पूरी तरह तानाशाहीपूर्ण है। प्रदर्शनकारियों ने निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए हैं:
- न्यायिक अनियमितता: फाइलों का निस्तारण कार्यालय के बजाय आवास पर किया जा रहा है, जो प्रोटोकॉल के विरुद्ध है।
- पारदर्शिता का अभाव: न्यायालयीन कार्यों में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के आरोप।
- अभद्र व्यवहार: न्यायालय में अधिवक्ताओं और वादकारियों के साथ शिष्टाचार का पालन न करना।
एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई न होने से बढ़ी नाराजगी
अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों से संबंधित जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम कुंडा वाचस्पति सिंह को पहले ही सौंपा था। लेकिन सात दिन बीत जाने के बाद भी शासन स्तर से कोई ठोस कार्रवाई न होने पर वकीलों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही तहसीलदार का स्थानांतरण नहीं किया गया, तो वे तहसील परिसर में तालाबंदी करने को मजबूर होंगे।
लगातार सात दिनों से चल रहे इस गतिरोध के कारण तहसील का प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दूर-दराज से आए फरियादियों और वादकारियों को बिना किसी समाधान के वापस लौटना पड़ रहा है। वकीलों के कार्य बहिष्कार से रजिस्ट्री और अन्य राजस्व संबंधी कार्य भी अधर में लटके हुए हैं।
विरोध प्रदर्शन में नीरज पाण्डेय, उपेन्द्र सिंह, सुशांत श्रीवास्तव, सत्येंद्र श्रीवास्तव, बृजेन्द्र मणि त्रिपाठी, गुरु प्रसाद श्रीवास्तव, दिलीप कुमार यादव, सिद्धनाथ सरोज, दिवाकर मिश्रा, प्रदीप कुमार पाण्डेय, पंकज शुक्ला, शोभनाथ दुबे, रबी सिंह, अमन केसरवानी, जय प्रताप सिंह समेत ढाई सौ से अधिक अधिवक्ता शामिल रहे।
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