हिमाचल में 'पुरुष बच्चेदानी' पर सियासी संग्राम: मेडिकल साइंस बनाम भ्रष्टाचार के आरोप, जानें क्या है पूरा मामला
हिमाचल की राजनीति में 'पुरुष बच्चेदानी' पर रार: सीएम सुक्खू ने लगाया घोटाले का आरोप, भाजपा ने दिया मेडिकल तर्क
शिमला: हिमाचल प्रदेश की शांत वादियों में इन दिनों एक अजीबोगरीब मुद्दे ने राजनीतिक पारा गरमा दिया है। मुद्दा है— 'पुरुषों में बच्चेदानी का ऑपरेशन'। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पिछली भाजपा सरकार पर 'हिमकेयर' (HIMCARE) योजना के तहत पुरुषों की बच्चेदानी के ऑपरेशन दिखाकर करोड़ों के घोटाले का आरोप लगाने के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।
सीएम का आरोप: ₹100 करोड़ का घोटाला
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में सनसनीखेज दावा किया कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल में हिमकेयर योजना के तहत भारी अनियमितताएं हुई हैं। सीएम के अनुसार, रिकॉर्ड में पुरुषों के भी ओवरी और बच्चेदानी के ऑपरेशन दिखाए गए हैं, जो तकनीकी रूप से असंभव प्रतीत होते हैं। उन्होंने इसे जनता के पैसे का दुरुपयोग बताते हुए लगभग 100 करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका जताई है और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
विपक्ष का पलटवार: 'मेडिकल साइंस को समझें सीएम'
इस आरोप पर भरमौर से भाजपा विधायक और पेशे से सर्जन डॉ. जनक राज ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव आकर मुख्यमंत्री के ज्ञान पर सवाल उठाए। डॉ. जनक राज ने तर्क दिया कि मेडिकल साइंस में 'पर्सिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम' (PMDS) जैसी स्थितियां होती हैं, जहाँ पुरुषों के शरीर के भीतर बच्चेदानी जैसे अवशेष पाए जा सकते हैं। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि हर्निया के ऑपरेशन के दौरान उन्होंने स्वयं एक पुरुष के पेट में बच्चेदानी जैसी संरचना देखी थी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
मेडिकल विशेषज्ञों की राय इस मामले में बंटी हुई है:
- डॉ. पुनीत महाजन (IGMC): उनका कहना है कि सामान्य तौर पर पुरुषों में बच्चेदानी नहीं होती। कुछ दुर्लभ जेनेटिक स्थितियों में बच्चेदानी जैसा हिस्सा विकसित हो सकता है, लेकिन इसे सामान्य मानना गलत है।
- डॉ. ज्योति महाजन (KNH): उन्होंने इसे 'अत्यंत दुर्लभ' करार देते हुए कहा कि PMDS एक ऐसी स्थिति है जहाँ हार्मोन की कमी के कारण पुरुष के शरीर में गर्भाशय के अवशेष रह जाते हैं। हालांकि, हिमाचल में ऐसे मामलों का रिकॉर्ड पर आना चौंकाने वाला है।
सियासी घमासान और जांच
नेता प्रतिपक्ष और पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने सरकार को घेरते हुए पूछा है कि अगर घोटाला हुआ था तो सरकार तीन साल तक क्यों चुप रही? उन्होंने आंकड़ों में विसंगति का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार खुद अपने बयानों में उलझ रही है।
फिलहाल, यह मुद्दा केवल मेडिकल साइंस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि हिमाचल की राजनीति में भ्रष्टाचार और विश्वसनीयता की जंग बन चुका है। अब जांच के बाद ही साफ होगा कि यह वास्तव में एक दुर्लभ चिकित्सा मामला था या सरकारी खजाने में सेंध लगाने की कोई साजिश।
(ETV)
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