कौशाम्बी: सुरक्षा पर भारी 'स्वार्थ'! ढाबा संचालकों ने रुकवाया हाईवे रेलिंग का काम, लूट की छूट खोने का डर?
कौशाम्बी में ढाबा संचालकों ने हाईवे सुरक्षा रेलिंग का काम रोका; लूटपाट की नीयत और गुंडागर्दी के आरोप
(एडवोकेट अजय पंडा / ब्यूरो)
कौशाम्बी: सुरक्षा पर भारी 'स्वार्थ'! ढाबा संचालकों ने रुकवाया हाईवे रेलिंग का काम, लूट की छूट खोने का डर?
कौशाम्बी। राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षित सफर के दावों को धता बताते हुए ढाबा संचालकों की दबंगई का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सैनी कोतवाली के कनवार बॉर्डर से लेकर कोखराज थाना क्षेत्र के गंगा नदी पुल तक एनएचएआई (NHAI) द्वारा सुरक्षा रेलिंग लगाने के कार्य को ढाबा संचालकों ने बलपूर्वक रुकवा दिया। इस दौरान न केवल कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की गई, बल्कि विकास और सुरक्षा के कार्यों में बाधा डालकर खुलेआम गुंडागर्दी का प्रदर्शन किया गया।
सुरक्षा के लिए अनिवार्य है रेलिंग
विदित हो कि कोखराज और सैनी क्षेत्र के बीच हाईवे पर बेतरतीब तरीके से सड़क पार करने वाले पैदल यात्रियों, साइकिल सवारों और बाइक चालकों के कारण आए दिन भीषण सड़क हादसे होते रहते हैं। इन दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए विभाग ने सड़क के दोनों ओर रेलिंग लगाने का निर्णय लिया था। रविवार को जब कर्मचारी इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा करने पहुंचे, तो स्थानीय ढाबा संचालक और उनके कर्मचारी लामबंद होकर विरोध पर उतर आए।
लूटपाट के सिंडिकेट पर चोट का खतरा?
इस विरोध के पीछे की कहानी बेहद चौंकाने वाली बताई जा रही है। सूत्रों और क्षेत्रीय चर्चाओं के अनुसार, इस मार्ग पर होने वाली दुर्घटनाओं के बाद सबसे पहले पहुंचने वाले लोग यही ढाबा संचालक और उनके कर्मचारी होते हैं। आरोप है कि ये लोग मदद के बहाने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों से नकदी, जेवरात और कीमती सामान पार कर देते हैं।
यदि हाईवे पर सुरक्षा रेलिंग लग जाती है, तो ढाबों से सड़क तक का सीधा रास्ता बंद हो जाएगा। ऐसे में दुर्घटना के बाद मौके पर तुरंत पहुंचकर 'लूटपाट' करने के मंसूबों पर पानी फिरना तय है। अपनी इसी अवैध कमाई और रसूख को बचाने के लिए इन संचालकों ने सरकारी कार्य में बाधा डाली है।
व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल
NHAI कर्मचारियों के साथ हुई अभद्रता और कार्य रोकने की इस घटना ने पुलिस-प्रशासन और हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। ढाबा संचालकों की इस मनमानी से न केवल राहगीरों की जान जोखिम में है, बल्कि यह सरकारी तंत्र को सीधी चुनौती भी है।
स्थानीय लोगों के बीच अब यह चर्चा आम है कि आखिर चंद लोगों के निजी स्वार्थ के लिए हजारों यात्रियों की सुरक्षा की बलि क्यों दी जा रही है? क्या प्रशासन इन 'सफेदपोश' गुंडों पर नकेल कसेगा या फिर हाईवे पर इसी तरह मौतों और लूट का खेल जारी रहेगा? फिलहाल, कार्य रुकने से विभाग को भारी नुकसान हुआ है और दुर्घटनाओं का खतरा बरकरार है।
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