प्रयागराज रेल मंडल का 'स्वर्णिम वर्ष': 2753 करोड़ की आय और 'कवच 4.0' से लैस हुआ ट्रैक
प्रयागराज रेल मंडल ने वर्ष 2025-26 में आय, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं में रचा इतिहास; कवच 4.0 और रिकॉर्ड माल ढुलाई प्रमुख
प्रयागराज। भारतीय रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण मंडलों में शुमार प्रयागराज मंडल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 को 'उपलब्धियों के वर्ष' के रूप में दर्ज किया है। मंडल रेल प्रबंधक (DRM) रजनीश अग्रवाल ने वार्षिक प्रेस वार्ता के दौरान आंकड़ों के साथ मंडल की प्रगति का खाका पेश किया। संकल्प सभागार में आयोजित इस बैठक में उन्होंने बताया कि सुरक्षा, तकनीक और सेवा के तालमेल से मंडल ने न केवल राजस्व के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, बल्कि यात्री अनुभव को भी हाई-टेक बनाया है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रयागराज मंडल ने 2753 करोड़ रुपये की कुल आय अर्जित की। माल ढुलाई के क्षेत्र में मंडल ने 7.945 मिलियन टन लोडिंग के साथ 843.63 करोड़ रुपये का अब तक का सर्वश्रेष्ठ राजस्व प्राप्त किया। परिचालन दक्षता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ट्रेनों की समयपालनता (Punctuality) पिछले वर्ष के 74.2% से बढ़कर 80.0% पर पहुंच गई। विशेष रूप से 15 अगस्त 2025 को मंडल ने 98.85% की रिकॉर्ड समयपालनता हासिल की।
रेलवे की महत्वाकांक्षी सुरक्षा प्रणाली 'कवच 4.0' का सफल क्रियान्वयन इस वर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। प्रयागराज-कानपुर सेक्शन के 190 किमी रूट पर इसे कमीशन किया गया है। इसके साथ ही, टूंडला-गाजियाबाद सेक्शन के बीच 160 किमी/घंटा की गति से लोको ट्रायल भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जो भविष्य की हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। संरक्षा को सुदृढ़ करते हुए 9 लेवल क्रॉसिंग गेट बंद किए गए और स्टेशनों पर 950 सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया।
यात्री सेवाओं के विस्तार के तहत 8 अमृत भारत स्टेशनों का पुनर्विकास कार्य पूर्ण किया गया। मंडल ने इस वर्ष 18 जोड़ी नई ट्रेनें शुरू कीं, जिनमें वंदे भारत और राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनें शामिल हैं। स्टेशनों पर स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए 'दवा-दोस्त' स्टॉल और 'जन औषधि केंद्र' खोले गए। साथ ही, 32 करोड़ की लागत से जीएमसी सैटेलाइट स्टेशन के निर्माण की स्वीकृति मिलना भविष्य की बड़ी योजना का हिस्सा है।
पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए मंडल ने अपनी सौर ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर 8.3 MWp कर लिया है, जिससे सालाना ₹4.16 करोड़ की बचत और कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आई है। वहीं, आरपीएफ के 'नन्हे फरिश्ते' अभियान ने 500 बच्चों को रेस्क्यू कर उन्हें नई जिंदगी दी, जबकि 'मेरी सहेली' अभियान के तहत साढ़े चार लाख से अधिक महिला यात्रियों को सुरक्षा प्रदान की गई।
प्रेस वार्ता के अंत में डीआरएम रजनीश अग्रवाल ने इस सफलता का श्रेय रेल कर्मचारियों की मेहनत और यात्रियों के सहयोग को दिया। इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक दीपक कुमार, मुबश्शिर वारिस, धनंजय कुमार सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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