कौशल विकास ही बनेगा 2047 के 'विकसित भारत' का आधार: प्रो. अशोक गाबा
यूपी राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में कौशल विकास पर संगोष्ठी; विशेषज्ञों ने 2047 तक भारत को विकसित बनाने का रोडमैप साझा किया
प्रयागराज :उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (UPRTOU) में शनिवार को 'क्षमता निर्माण कार्यक्रम' का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य केंद्र 'ग्रेजुएट एम्पलायबिलिटी' और 'नेशनल स्किल्स क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क' (NSQF) रहा। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि केवल पारंपरिक शिक्षा नहीं, बल्कि कौशल आधारित प्रशिक्षण ही युवाओं को रोजगार दिलाएगा।
मुख्य अतिथि, एनसीवीईटी (NCVET) के कार्यपालक सदस्य प्रो. अशोक गाबा ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में कुशल मानव संसाधन तैयार करना देश की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
2047 का लक्ष्य: कौशल विकास पाठ्यक्रमों के माध्यम से ही भारत 'विकसित राष्ट्र' बनने का सपना पूरा कर सकता है।
स्थानीय उद्योगों की भूमिका: किसी भी कोर्स को डिजाइन करने से पहले क्षेत्रीय औद्योगिक प्रतिनिधियों से चर्चा अनिवार्य है ताकि शत-प्रतिशत रोजगार सुनिश्चित हो सके।
स्टार्टअप की नींव: देश के सफल स्टार्टअप किसी न किसी विशिष्ट कौशल पर ही आधारित हैं।
विशिष्ट अतिथि अमित शर्मा (मुख्य सलाहकार, NCVET) ने परिषद की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मुक्त विश्वविद्यालय अब 'अवॉर्डिंग और एसेसिंग बॉडी' की मान्यता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने व्यावसायिक प्रशिक्षण के मानकों और नियामक ढांचे के महत्व को रेखांकित किया।
एआई और आधुनिक शिक्षा का समावेश
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने घोषणा की कि विश्वविद्यालय ने प्रत्येक कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को एक विषय के रूप में शामिल किया है।
"आज का युग कौशल का युग है। जो शिक्षक विद्यार्थियों में जितना अधिक कौशल पैदा करेगा, उन विद्यार्थियों की बाजार में मांग उतनी ही अधिक होगी।" - प्रो. सत्यकाम
कुलपति ने यह भी साझा किया कि ये पाठ्यक्रम हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में उपलब्ध होंगे, जो उत्तर प्रदेश की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं को सक्षम बनाएंगे।
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