मथुरा में अवैध निर्माणों का 'मायाजाल': प्राधिकरण के नोटिस बने कागजी घोड़े, धड़ल्ले से खड़ा हो रहा कंक्रीट का जंगल
मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की नाक के नीचे अवैध कमर्शियल निर्माणों की बाढ़। नोटिस के नाम पर केवल खानापूर्ति का आरोप।
(सुमित गोस्वामी )
मथुरा: कान्हा की नगरी में इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर बहुमंजिला अवैध इमारतों को खड़ा करने की होड़ मची है। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (MVDA) की सुस्त कार्यप्रणाली और 'नोटिस-नोटिस' के खेल ने शहर को अवैध निर्माणों के दलदल में धकेल दिया है। आलम यह है कि बिना मानचित्र स्वीकृत कराए व्यावसायिक परिसर धड़ल्ले से बन रहे हैं और जिम्मेदार विभाग केवल फाइलें भरने तक सीमित है।
नोटिस के बाद शुरू होता है 'असली खेल'
प्राधिकरण की कार्यशैली पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अवैध निर्माण चिह्नित होने पर नोटिस तो जारी होता है, लेकिन उसके बाद की प्रभावी कार्रवाई यानी सीलिंग या ध्वस्तीकरण ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नोटिस का इस्तेमाल केवल 'सांठगांठ' के लिए एक दबाव के रूप में किया जाता है। एक बार 'लेन-देन' की प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य फिर से अपनी गति पकड़ लेता है।
इन इलाकों में मानकों की सरेआम धज्जियाँ
- शहर के मुख्य और रिहायशी क्षेत्रों में अवैध निर्माणों की बाढ़ आ गई है:
- धौलीप्याऊ और यमुनापार: यहाँ बिना स्वीकृत मानचित्र के बड़ी कमर्शियल इमारतें खड़ी हो गई हैं।
लक्ष्मीनगर: इस क्षेत्र में नियमों की अनदेखी कर संकरी गलियों में भी व्यावसायिक निर्माण हो रहे हैं।
इन अवैध निर्माणों के कारण जहाँ एक ओर सरकार को करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही है, वहीं दूसरी ओर भविष्य में यातायात जाम और मूलभूत सुविधाओं के चरमराने का खतरा भी बढ़ गया है।
जब इस संदर्भ में विभागीय अधिकारियों से सवाल किए जाते हैं, तो वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। अधिकारी केवल इतना कहकर मौन साध लेते हैं कि "हमने तो नोटिस की कार्यवाही कर दी है।" सवाल यह उठता है कि क्या नोटिस जारी करना ही अंतिम समाधान है? ध्वस्तीकरण की कार्रवाई केवल छोटे निर्माणों तक ही क्यों सीमित रह जाती है?
जनता की मांग: स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विकास प्राधिकरण भ्रष्टाचार को दरकिनार कर सख्ती से ध्वस्तीकरण और भारी जुर्माना लगाए, तभी इन भू-माफियाओं के हौसले पस्त होंगे। वर्तमान में जारी 'खानापूर्ति' केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।
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