मन स्वस्थ तो तन स्वस्थ: महामाया मेडिकल कॉलेज में डिप्रेशन और तनाव के विरुद्ध छात्रों को मिला 'संजीवनी' मंत्र

महामाया मेडिकल कॉलेज अम्बेडकरनगर, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, डॉ. अमित कुमार गुप्ता, डिप्रेशन से बचाव, यूजीसी वेलबीइंग गाइडलाइंस

Apr 23, 2026 - 21:34
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मन स्वस्थ तो तन स्वस्थ: महामाया मेडिकल कॉलेज में डिप्रेशन और तनाव के विरुद्ध छात्रों को मिला 'संजीवनी' मंत्र

अम्बेडकरनगर: वर्तमान समय की भागदौड़ भरी जिंदगी और प्रतिस्पर्धा के बीच युवाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से सद्दरपुर स्थित महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में एक विशेष 'मानसिक स्वास्थ्य एवं वेलबीइंग' जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशा-निर्देशों पर आधारित इस कार्यक्रम ने छात्रों को तनाव की बेड़ियों से निकलकर सकारात्मकता की ओर बढ़ने का रास्ता दिखाया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार गुप्ता ने युवाओं में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा:

"नकारात्मक विचार और मानसिक तनाव कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक स्थिति है जिसे सही मार्गदर्शन और संवाद से बदला जा सकता है। आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी है कि हम अपने मन की बात साझा करने में संकोच न करें।"

शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही जरूरी है मानसिक स्वास्थ्य
विशिष्ट वक्ता डॉ. पारुल यादव ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि मानसिक समस्याओं को लेकर समाज में व्याप्त 'शर्म' (Stigma) को खत्म करना होगा। उन्होंने सलाह दी कि जब भी मन भारी महसूस हो, तो विशेषज्ञ की सलाह और काउंसलिंग लेने में देरी न करें।

खुला संवाद: सुंदरलाल रामा नर्सिंग कॉलेज के छात्रों ने विशेषज्ञों से अपनी समस्याओं और करियर के तनाव से जुड़े सवाल पूछे।

  • व्यावहारिक समाधान: विशेषज्ञों ने तनाव प्रबंधन (Stress Management) के लिए योग, संतुलित नींद और सोशल मीडिया के संतुलित उपयोग के सुझाव दिए।
  • सहयोग और टीम: कार्यक्रम में नर्सिंग ऑफिसर, लिपिक वर्ग से अरविंद त्रिपाठी, प्रशांत सिंह, अभिषेक कुमार और नर्सिंग स्टाफ से सीमा, नीलम देवी, आभा दीक्षित सहित पूरी टीम ने सक्रिय योगदान दिया।

काउंसलर विनोद कनौजिया और डाटा मैनेजर स्वीटी शर्मा ने भी छात्रों को मानसिक संबल प्रदान करने के तरीकों पर चर्चा की। कॉलेज प्रशासन की इस पहल को अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए एक नजीर माना जा रहा है।

निष्कर्ष: कार्यक्रम का सार यही रहा कि 'सकारात्मक सोच और समय पर मदद' ही डिप्रेशन के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। महामाया मेडिकल कॉलेज ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि स्वस्थ मन ही उज्जवल भविष्य की आधारशिला है।

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