रंगमंच की जीवंत प्रस्तुति: त्रिवेणी कला संगम में तीन दिवसीय नाट्य समारोह का शानदार आगाज

दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम में तीन दिवसीय नाट्य समारोह का आगाज; 'ब्रह्मर्षि विश्वामित्र' और 'फटी हुई शादी की साड़ी' ने जीता दिल

Apr 25, 2026 - 13:30
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रंगमंच की जीवंत प्रस्तुति: त्रिवेणी कला संगम में तीन दिवसीय नाट्य समारोह का शानदार आगाज

नई दिल्ली: राजधानी के सांस्कृतिक केंद्र मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में तीन दिवसीय नाट्य सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। इस समारोह के पहले दिन ऐतिहासिक और सामाजिक पृष्ठभूमि पर आधारित नाटकों के मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का उद्घाटन भाजपा नेता सुधीर अग्रवाल और गुरु सपन आचार्य ने दीप प्रज्वलित कर किया।

'ब्रह्मर्षि विश्वामित्र' और 'फटी हुई शादी की साड़ी' का जादू
समारोह के पहले दिन दो प्रमुख नाटकों का मंचन किया गया, जिन्होंने मानवीय संवेदनाओं और पौराणिक कथाओं को जीवंत कर दिया:

ब्रह्मर्षि विश्वामित्र: इस नाटक में महर्षि विश्वामित्र की मुख्य भूमिका कुलदीप वशिष्ठ ने निभाई। उनके प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को बांधे रखा। अन्य कलाकारों में खुशबू राजपूत (मेनका), शिवा (विश्वव्रत), ऋतिक शर्मा (इंद्र) और अकबर (गुरु वशिष्ठ) ने अपने पात्रों के साथ पूरा न्याय किया।

फटी हुई शादी की साड़ी: यह नाटक ग्रामीण जीवन की विडंबनाओं और एक स्त्री के आत्मसम्मान की मार्मिक गाथा पर आधारित था, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया।

इसके अतिरिक्त, नृत्य समूह द्वारा प्रस्तुत छऊ लोकनृत्य को भी कलाप्रेमियों की खूब सराहना मिली।

गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में दिल्ली भाजपा के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के सह-संयोजक ऋषि साहनी, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता चन्द्र कांत, अनिल वशिष्ठ और वरिष्ठ पत्रकार रितेश सिन्हा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मंच संचालन रजनी सेन ने किया, जबकि संगीत और प्रकाश व्यवस्था ने प्रस्तुतियों में चार चांद लगा दिए।

सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास
संस्था के महासचिव और आयोजनकर्ता रिजवान रज़ा ने रंगमंच के महत्व पर जोर देते हुए कहा:

"आज के डिजिटल युग में रंगमंच जैसी जीवंत कला को संरक्षित करना अनिवार्य है। यह सम्मेलन न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक सशक्त मंच भी है।"

संस्था के अध्यक्ष कुलदीप वशिष्ठ के मार्गदर्शन में आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन ने पहले ही दिन अपनी सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का मौका मिलता है।

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