क्या जिम जाने वाली बॉडी और अच्छी डाइट फर्टिलिटी की गारंटी है? डॉ. मधुलिका सिंह का खुलासा
बाहरी फिटनेस प्रजनन क्षमता की गारंटी नहीं है। डॉ. मधुलिका सिंह से जानें क्यों युवाओं में बढ़ रही है इनफर्टिलिटी।
प्रयागराज : आज के दौर में 29-30 साल का एक युवक, जो नियमित जिम जाता है और संतुलित आहार लेता है, खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानता है। उसे लगता है कि पिता बनने की राह में उसे कोई समस्या नहीं आएगी। लेकिन चिकित्सा जगत के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, प्रयागराज की विशेषज्ञ डॉ. मधुलिका सिंह के अनुसार, बाहरी फिटनेस और युवा उम्र हमेशा आंतरिक प्रजनन क्षमता (Fertility) का पैमाना नहीं हो सकते।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में हर 6 में से 1 वयस्क इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहा है। डॉ. सिंह बताती हैं कि पिछले कुछ दशकों में पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है। तनाव, नींद की कमी, मेटाबॉलिक असंतुलन और पर्यावरणीय प्रदूषक चुपचाप शरीर के भीतर जैविक परिवर्तन (Biological changes) कर रहे हैं, जो सामान्य दिखने वाले व्यक्ति को भी प्रभावित कर सकते हैं।
अक्सर लोग वीर्य की सामान्य रिपोर्ट को ही सफलता का मानक मान लेते हैं। डॉ. सिंह स्पष्ट करती हैं कि शुक्राणुओं की केवल संख्या ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गतिशीलता (Motility) और संरचना (Morphology) भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कई बार सामान्य दिखने वाली रिपोर्ट के बावजूद डीएनए विखंडन (DNA Fragmentation) जैसी समस्याएं होती हैं, जो गर्भपात का कारण बनती हैं।
महिलाओं में भी 30 की उम्र के बाद अंडाणुओं की संख्या (Egg Reserve) और गुणवत्ता में तेजी से कमी आने लगती है। पीसीओएस (PCOS), थायराइड या हल्के एंडोमेट्रियोसिस जैसे विकार अक्सर बिना किसी गंभीर लक्षण के शरीर में मौजूद रहते हैं। ऐसे में AMH (एंटी-म्यूलरियन हार्मोन) जैसी जांचें वास्तविक स्थिति को समझने में मदद करती हैं।
देरी से माता-पिता बनने की योजना बनाने वाले जोड़ों के लिए डॉ. सिंह की सलाह है कि वे केवल बाहरी धारणाओं पर न टिकें। सही समय पर वैज्ञानिक परामर्श और आधुनिक जांचें ही पितृत्व का सुख सुनिश्चित कर सकती हैं।
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