AI तकनीक और आधुनिक मशीनों से अब घर-घर होगा फेफड़ों की बीमारी का खात्मा
कानपुर के GSVM मेडिकल कॉलेज में टीबी पर विशेष कार्यशाला; AI तकनीक और 4 आधुनिक मशीनों से होगा अब सटीक इलाज।
कानपुर: "टीबी का इलाज अब पूरी तरह संभव है"—इसी आत्मविश्वास के साथ कानपुर के जीएसवीएम (GSVM) मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा 'एक्स्ट्रापल्मोनरी ट्यूबरक्लोसिस' पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला (CME) का आयोजन किया गया। प्रोजेक्ट 'शक्ति' के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य "यस, वी कैन एंड टीबी" के वैश्विक विजन को जन-शक्ति के माध्यम से धरातल पर उतारना रहा।
टीबी उन्मूलन की दिशा में प्रशासन ने कमर कस ली है। जिले को चार आधुनिक मशीनें प्राप्त हुई हैं, जो अब शहरों के साथ-साथ सुदूर गांवों में भी घर-घर जाकर लोगों का परीक्षण करेंगी। प्रशासन ने 100 दिनों का विशेष लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत क्षेत्रीय सांसदों और विधायकों के सहयोग से शिविर लगाए जाएंगे। दावा किया जा रहा है कि आधुनिक तकनीक और त्वरित जांच से महज 7 दिनों के भीतर इलाज की प्रक्रिया सुचारू कर दी जाएगी।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुबोध कुमार ने एक क्रांतिकारी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अब AI युक्त एक्स-रे मशीनों का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक न केवल मरीज की रिपोर्टिंग करेगी, बल्कि फेफड़ों की स्थिति देखकर यह भी बताएगी कि बीमारी कितनी गंभीर है और उसका सटीक निराकरण क्या है।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानाचार्य डॉ. संजय काला और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने किया। विशेषज्ञों ने बताया कि:
- हाई रिस्क: 30 से 50 वर्ष के मधुमेह रोगी, धूम्रपान करने वाले, गर्भवती महिलाएं और स्वास्थ्य कर्मी इस बीमारी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं।
- प्रोटीन का महत्व: प्रत्येक व्यक्ति को शरीर के वजन के अनुसार 1 ग्राम प्रति किलो प्रोटीन लेना अनिवार्य है, ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।
बाल रोग विभाग के डॉ. अमितेश यादव ने चिंताजनक आंकड़े साझा करते हुए बताया कि विश्व के टीबी औसत की तुलना में भारत में लगभग 30 प्रतिशत बच्चे इस बीमारी की चपेट में हैं।
लक्षण: यदि बच्चे का वजन 2 हफ्ते तक न बढ़े, 5% वजन कम हो जाए या लगातार खांसी रहे, तो यह टीबी हो सकता है। गले में गांठ होना भी इसका एक प्रमुख संकेत है।
इस सेमिनार में नई दिल्ली से आए संयुक्त आयुक्त डॉ. संजय कुमार मट्टू ने 'टीबी मुक्त भारत' अभियान के रोडमैप पर चर्चा की। इस अवसर पर डॉ. रिचा गिरी, डॉ. मधु यादव और डॉ. विकास मिश्रा सहित चिकित्सा जगत के कई दिग्गज उपस्थित रहे। यह आयोजन भविष्य के डॉक्टरों के लिए अनुसंधान और उपचार के नए द्वार खोलने वाला साबित हुआ।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0