पेरिस में जयशंकर का कूटनीतिक कौशल: वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की चुनौतियों को दी प्रमुखता
विदेश मंत्री जयशंकर ने पेरिस G7 बैठक में ग्लोबल साउथ की चुनौतियों और UNSC सुधार पर जोर दिया। आईएमईसी और एफटीए पर भी चर्चा।
पेरिस: फ्रांस की राजधानी पेरिस के निकट 'अब्बाये डेस-वॉक्स-डी-सर्ने' में आयोजित G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने एक बार फिर दुनिया के सामने 'ग्लोबल साउथ' का पक्ष मजबूती से रखा। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि बदलते भू-राजनीतिक परिवेश में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार अब अनिवार्य हो चुका है।
26-27 मार्च को आयोजित इस महत्वपूर्ण सत्र में डॉ. जयशंकर ने आर्थिक रूप से कमजोर और विकासशील देशों के सामने खड़ी ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि शांति स्थापना अभियानों को सुव्यवस्थित करने और मानवीय आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) को मजबूत बनाना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
बैठक के दूसरे सत्र में विदेश मंत्री ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) पर भारत के दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण उत्पन्न अनिश्चितताओं ने अधिक मजबूत व्यापारिक गलियारों की जरूरत को बढ़ा दिया है। यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) ने आईएमईसी की उपयोगिता को और अधिक प्रासंगिक बना दिया है।
बैठक से इतर डॉ. जयशंकर की कूटनीति काफी सक्रिय रही:
- कनाडा: कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की गई।
- फ्रांस: मेजबान विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और शिपिंग सुरक्षा (Shipping Security) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई।
- अन्य: उन्होंने जर्मनी के जोहान वाडेफुल और यूक्रेन के आंद्री सिबिहा सहित कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
डॉ. जयशंकर की यह यात्रा दर्शाती है कि भारत वैश्विक शासन (Global Governance) में सुधार लाने और विकासशील देशों की चिंताओं को विकसित देशों के मंच पर रखने के अपने संकल्प पर अडिग है।
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