डॉ. एस. जयशंकर और यूएनजीए अध्यक्ष की मुलाकात, 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बुलंद करने और यूएन सुधारों पर बनी सहमति

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और UNGA अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक ने नई दिल्ली में यूएन सुधारों और ग्लोबल साउथ के हितों पर चर्चा की।

Apr 28, 2026 - 21:22
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डॉ. एस. जयशंकर और यूएनजीए अध्यक्ष की मुलाकात, 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बुलंद करने और यूएन सुधारों पर बनी सहमति

(शाश्वत तिवारी)

नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक की भारत यात्रा ने भारत और संयुक्त राष्ट्र के संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। मंगलवार को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और बेयरबॉक के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में वैश्विक चुनौतियों, बहुपक्षीय सहयोग और संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों को लेकर गहन मंथन हुआ।

विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक संस्थाओं को 'आज की वास्तविकताओं' के अनुरूप ढलना होगा। उन्होंने 'सुधारित बहुपक्षवाद' की वकालत करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की संरचना में बदलाव आवश्यक है ताकि 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की चिंताओं और उनकी आवाज को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए बेयरबॉक के नेतृत्व की सराहना की।

चर्चा के मुख्य बिंदु: एआई और पश्चिम एशिया संकट

  • मुलाकात के दौरान चार प्रमुख विषयों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया:
  • संयुक्त राष्ट्र सुधार (UN80): संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संरचनात्मक बदलाव।
  • सतत विकास लक्ष्य (SDG): विकास की गति को तेज करने के लिए वैश्विक सहयोग।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): एआई के प्रभाव और इसका लाभ गरीब देशों तक पहुँचाना।
  • पश्चिम एशिया संघर्ष: वैश्विक शांति और संघर्षों के समाधान पर विचार-विमर्श।

राजघाट पर श्रद्धांजलि और एआई संवाद
अपनी आधिकारिक यात्रा की शुरुआत में बेयरबॉक ने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ एआई के संचालन और विनियमन (Regulation) पर संवाद किया। बेयरबॉक ने विशेष रूप से भारत के एआई गवर्नेंस मॉडल की सराहना की और इसे समझने में गहरी रुचि दिखाई।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस यात्रा को संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। डॉ. जयशंकर ने दोहराया कि तकनीक का लाभ इस तरह मिलना चाहिए कि दुनिया का कोई भी देश विकास की दौड़ में पीछे न छूटे।

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