भारतीय दूतावास ने 'आतंकवाद की मानवीय कीमत' प्रदर्शनी के जरिए पाकिस्तान को किया बेनकाब

वाशिंगटन में भारतीय दूतावास ने पहलगाम हमले की बरसी पर 'आतंकवाद की मानवीय कीमत' प्रदर्शनी लगाई; पाक समर्थित आतंक पर कड़ा प्रहार

Apr 24, 2026 - 18:28
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भारतीय दूतावास ने 'आतंकवाद की मानवीय कीमत' प्रदर्शनी के जरिए पाकिस्तान को किया बेनकाब

वाशिंगटन डी.सी.: अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के विरुद्ध आवाज बुलंद करते हुए वाशिंगटन डी.सी. में एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया। ‘आतंकवाद की मानवीय कीमत’ (The Human Cost of Terrorism) शीर्षक वाली इस प्रदर्शनी का आयोजन 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले की पहली बरसी के अवसर पर किया गया। भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इस डिजिटल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

इस प्रदर्शनी का प्राथमिक उद्देश्य पहलगाम हमले के उन 26 निर्दोष पीड़ितों की स्मृति को सम्मान देना था, जिन्होंने सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद के कारण अपनी जान गंवाई। प्रदर्शनी में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया कि किस प्रकार पाकिस्तान स्थित आतंकी समूहों ने निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया।

डिजिटल माध्यम से प्रदर्शित इस गैलरी में केवल पहलगाम ही नहीं, बल्कि 1993 के मुंबई बम विस्फोट और 2008 के 26/11 हमलों सहित वैश्विक आतंकवाद के अन्य काले अध्यायों को भी उजागर किया गया। इसमें लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों और उनके पाकिस्तानी आकाओं की भूमिका को तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया गया।

इस कार्यक्रम की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें अमेरिकी कांग्रेस के 19 सदस्यों, प्रशासनिक अधिकारियों और प्रवासी भारतीय नेताओं ने शिरकत की। भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिकी भागीदारों की उपस्थिति भारत-अमेरिका आतंकवाद-रोधी साझेदारी को और अधिक सशक्त बनाती है।

राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को दोहराते हुए कहा कि भारत आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने विश्व समुदाय से आह्वान किया कि आतंकवाद को हराने के लिए सभी राष्ट्रों को एक मंच पर आना होगा।

वहीं, अमेरिकी सांसद ब्रैड शेरमैन ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों पर नकेल कसने की मांग की। उन्होंने उल्लेख किया कि 'द रेजिस्टेंस फोर्स' जैसे समूहों ने पीड़ितों को धर्म के आधार पर चुनकर निशाना बनाया, जिन्हें पाकिस्तान में सुरक्षित पनाह मिली हुई है।

यह प्रदर्शनी न केवल एक शोक सभा थी, बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक कूटनीति का एक प्रभावी प्रदर्शन भी रही, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के सुरक्षा हितों को पुरजोर तरीके से रखा।

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