विशेष रिपोर्ट: पॉश इलाके में सुरक्षा ताक पर, अवैध गोदामों से सहमे नागरिक

मथुरा की तिलक नगर कॉलोनी में अवैध प्लास्टिक और साड़ी गोदामों से बढ़ा आग का खतरा। निवासियों ने प्रशासन से की हटाने की मांग

May 03, 2026 - 18:57
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विशेष रिपोर्ट: पॉश इलाके में सुरक्षा ताक पर, अवैध गोदामों से सहमे नागरिक

(सुमित गोस्वामी / ब्यूरो)

मथुरा: धर्मनगरी के हृदय स्थल के निकट स्थित पॉश आवासीय कॉलोनी तिलक नगर (पंजाबी कॉलोनी) इन दिनों एक अनजाने डर के साए में जी रही है। जिस कॉलोनी को कभी शांति और सौहार्द के लिए जाना जाता था, आज वह अवैध रूप से संचालित प्लास्टिक और साड़ी के गोदामों के कारण 'टाइम बम' में तब्दील हो गई है। रिहायशी इलाके के बीचों-बीच भारी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री का भंडारण स्थानीय निवासियों की जान के लिए बड़ा खतरा बन गया है।

बिना फायर सेफ्टी के चल रहा है 'मौत का कारोबार'
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कॉलोनी की गलियों में जगह-जगह ऐसे गोदाम बना लिए गए हैं, जिनमें प्लास्टिक जैसा अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ ठूस-ठूस कर भरा गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन गोदामों में अग्निशमन (फायर सेफ्टी) के न्यूनतम इंतजाम भी मौजूद नहीं हैं। घनी आबादी के बीच संचालित इन गोदामों में यदि छोटी सी चिंगारी भी सुलगती है, तो वह विकराल रूप ले सकती है, जिससे पूरी कॉलोनी खाक हो सकती है।

पुरानी घटनाओं से भी नहीं लिया सबक
कॉलोनीवासियों ने बताया कि कुछ समय पहले ही एक गोदाम में आग लगने की घटना हो चुकी है। उस वक्त मोहल्ले के लोगों ने सूझबूझ और सामूहिक प्रयास से आग पर काबू पा लिया था, जिससे एक बड़ी त्रासदी टल गई। लेकिन इस घटना के बावजूद न तो गोदाम संचालकों की आंखें खुलीं और न ही प्रशासन ने कोई कड़ा रुख अपनाया।

अतिक्रमण और अभद्रता से लोग परेशान
गोदामों की वजह से तिलक नगर की चौड़ी गलियां अब संकरी हो गई हैं। माल ढोने वाले वाहनों और अवैध पार्किंग के कारण रास्तों पर हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है। निवासियों का कहना है कि:

  • आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या दमकल की गाड़ी का निकलना भी मुश्किल है।
  • गोदामों में काम करने वाले कर्मचारियों का व्यवहार स्थानीय लोगों के प्रति अभद्र रहता है।
  • कॉलोनी का शांत वातावरण पूरी तरह से व्यावसायिक गतिविधियों की भेंट चढ़ चुका है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
कॉलोनीवासियों का दावा है कि उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों से कई बार लिखित शिकायत की है, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर रिहायशी क्षेत्र के भीतर इन व्यावसायिक और जोखिम भरे गोदामों को संचालन की अनुमति किसने दी? क्या इन संचालकों को किसी रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है, या फिर प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

तिलक नगर में बढ़ता यह खतरा केवल एक कॉलोनी की समस्या नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही का ज्वलंत उदाहरण है। कॉलोनीवासियों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से मांग की है कि इन गोदामों को तत्काल प्रभाव से आबादी वाले क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित किया जाए, ताकि सैकड़ों परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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