कोल्ड प्लंज और स्पर्म काउंट: क्या है असली कनेक्शन?

Feb 12, 2026 - 17:10
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कोल्ड प्लंज और स्पर्म काउंट: क्या है असली कनेक्शन?

लखनऊ : सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो अब आम हो गए हैं, जिनमें पुरुष बर्फ़ से भरे टब में उतरते दिखाई देते हैं। सांस से भाप निकल रही होती है और दावा किया जाता है की इस क्रिया से ध्यान बेहतर हुआ, टेस्टोस्टेरोन बढ़ा, और शुक्राणु भी मज़बूत हुए। ठंडे पानी से नहाने को भी अब शुक्राणुओं की सेहत सुधारने का आसान तरीका बताया जाने लगा है। सुनने में यह बात काफ़ी प्रभावशाली लगती है जैसे कि मानो शरीर को झटका देने से वह खुद को बेहतर बना लेगा। लेकिन डॉ. श्रेया गुप्ता, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, लखनऊ  कहती हैं कि शरीर का विज्ञान इतना सरल नहीं होता।

आजकल ज़्यादा पुरुष यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या ठंड के संपर्क में आना वीर्य जांच की रिपोर्ट सुधार सकता है। यह सवाल अपने आप में उस बढ़ती चिंता को दिखाता है, जो पुरुष प्रजनन क्षमता को लेकर सामने आ रही है। पिछले चार दशकों में दुनिया भर में शुक्राणुओं की संख्या में 50 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे आंकड़ों के सामने त्वरित समाधान आकर्षक लगने लगते हैं। लेकिन विज्ञान हमेशा संतुलन की मांग करता है।

शरीर की बनावट को देखें तो अंडकोष शरीर के बाहर स्थित होते हैं, और इसके पीछे एक कारण है। शुक्राणु निर्माण के लिए शरीर के अंदरूनी तापमान से लगभग दो से चार डिग्री कम तापमान ज़रूरी होता है। लंबे समय तक अधिक गर्मी – जैसे स्टीम बाथ, गरम पानी के टब या बहुत तंग कपड़े – शुक्राणुओं की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए सिद्धांत रूप से ठंडा वातावरण उपयोगी लग सकता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि जितना ठंडा, उतना बेहतर।

कुछ समय के लिए ठंडे पानी का इस्तेमाल या बर्फ़ में बैठना रक्त संचार को बेहतर कर सकता है और सूजन कम कर सकता है। लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस चिकित्सीय प्रमाण नहीं है जो यह दिखाए कि इससे शुक्राणुओं की संख्या बढ़ती है या उनकी गति और बनावट में स्थायी सुधार होता है। छोटे स्तर के अध्ययनों में यह पाया गया है कि ठंड के संपर्क से कुछ समय के लिए तनाव से जुड़े हार्मोन बढ़ सकते हैं, लेकिन टेस्टोस्टेरोन पर इसका असर अस्थायी और असंगत रहता है। प्रजनन क्षमता कुछ मिनटों के बदलाव से नहीं, बल्कि महीनों तक बने रहने वाले हार्मोनल संतुलन से तय होती है।

यह भी समझना ज़रूरी है कि अत्यधिक ठंड खुद एक तरह का तनाव है। लंबे समय तक बना रहने वाला शारीरिक तनाव शरीर की उस हार्मोनल प्रणाली को दबा सकता है, जो शुक्राणु निर्माण के लिए ज़िम्मेदार होती है। ऐसे में जिस प्रक्रिया से फायदा होने की उम्मीद की जाती है, वही नुकसान का कारण बन सकती है।

असल में, जो उपाय सबसे भरोसेमंद हैं, वे दिखने में कम आकर्षक लगते हैं। संतुलित वजन बनाए रखना, नियमित लेकिन मध्यम स्तर की कसरत, पूरी नींद, शराब सीमित करना, धूम्रपान से बचना और मधुमेह या वेरिकोसेल जैसी समस्याओं का सही इलाज – इन सभी के पक्ष में मज़बूत वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद हैं।

जो दंपति फर्टिलिटी इलाज पर विचार कर रहे हैं, उनके लिए यह समझना ज़रूरी है कि ट्रेंड्स बुनियादी आदतों की जगह नहीं ले सकते। शरीर अचानक झटकों से नहीं, बल्कि निरंतरता से बेहतर प्रतिक्रिया देता है। ठंडा पानी दिमाग़ को जगा सकता है, लेकिन जब बात शुक्राणुओं की सेहत की हो, तो स्थिर और संतुलित जीवनशैली ही सबसे ज़्यादा असर दिखाती है।

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