मेडागास्कर के लिए फिर 'देवदूत' बना भारत: चक्रवात की तबाही के बीच भेजी 30 टन राहत सामग्री
भारत ने चक्रवात प्रभावित मेडागास्कर को 30 टन मानवीय सहायता भेजकर 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' और 'संकटमोचन' की अपनी भूमिका को पुनः सिद्ध किया।
एंटानानारिवो/नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र में 'प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले' (First Responder) देश के रूप में अपनी साख को और मजबूत करते हुए भारत ने चक्रवात प्रभावित मेडागास्कर की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। चक्रवात 'फिटिया' और 'गेज़ानी' से आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच, भारतीय वायु सेना का विशालकाय सी-17 (C-17) ग्लोबमास्टर विमान 30 टन से अधिक राहत सामग्री लेकर मेडागास्कर की राजधानी एंटानानारिवो पहुंचा।
सहायता खेप में क्या है शामिल?
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, इस खेप में मानवीय संवेदनाओं और सुरक्षा का मिश्रण है:
- 12 टन चिकित्सा सहायता: जीवन रक्षक दवाएं, सर्जिकल उपकरण और चिकित्सा किट।
- 18 टन आपदा राहत सामग्री: टेंट, वॉटर स्टोरेज टैंक, डिग्निटी किट और 'रेडी-टू-ईट' भोजन।
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सगर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) विजन और 'ग्लोबल साउथ' के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
'ऑपरेशन वनीला' से आज तक: एक अटूट दोस्ती
- यह पहली बार नहीं है जब भारत ने मेडागास्कर के लिए 'संकटमोचन' की भूमिका निभाई है। भारत का यह मानवीय मिशन एक लंबी परंपरा का हिस्सा है:
- ऑपरेशन वनीला (2020): जब भीषण चक्रवात ने मेडागास्कर में तबाही मचाई थी, तब भारतीय नौसेना सबसे पहले रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए पहुंची थी।
- कोविड-19 काल: महामारी के दौरान भारत ने 600 टन चावल और आवश्यक दवाएं भेजकर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की थी।
- कृषि सहयोग: भारत लगातार मेडागास्कर के कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने में तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।
"भारत मेडागास्कर के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। यह मदद हमारी लंबे समय की दोस्ती और साउथ-साउथ कोऑपरेशन के प्रति हमारे समर्पण का प्रतीक है।"
— भारतीय दूतावास, मेडागास्कर
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