भारतीय सेल्स सेक्टर में 'एआई' का शंखनाद: 91% प्रोफेशनल्स ने माना भविष्य का सार, परफॉर्मेंस में भारी उछाल
सेल्सफोर्स की रिपोर्ट: 91% भारतीय सेल्स प्रोफेशनल्स ने AI एजेंट्स को माना अनिवार्य; 2026 तक 'एआई-फर्स्ट' अप्रोच की लहर।
लखनऊ। भारत का सेल्स जगत अब केवल 'हसल' (जद्दोजहद) का क्षेत्र नहीं रहा, बल्कि यह 'हाई-प्रिसिजन' और तकनीक के समावेश का नया केंद्र बन गया है। सेल्सफोर्स द्वारा जारी 'स्टेट ऑफ सेल्स' रिपोर्ट 2026 के ताजा आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि 91% भारतीय सेल्स प्रोफेशनल्स अब एआई (AI) एजेंट्स को अपनी सफलता के लिए अनिवार्य मान रहे हैं।
रिपोर्ट के चौंकाने वाले तथ्य बताते हैं कि एक औसत भारतीय विक्रेता अपना केवल 41% समय ही वास्तविक बिक्री (Selling) में लगा पाता है, जबकि शेष समय डेटा एंट्री और प्रशासनिक कार्यों की भेंट चढ़ जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए अब 'एआई-फर्स्ट' अप्रोच को तेजी से अपनाया जा रहा है।
प्रमुख आंकड़े: एआई की बढ़ती स्वीकार्यता
- मानसिक राहत: 89% विक्रेताओं का मानना है कि एआई के उपयोग से उनके काम का बोझ कम हुआ है।
- उपयोग का स्तर: 90% संगठन लीड स्कोरिंग और ईमेल ड्राफ्टिंग के लिए पहले से ही एआई का सहारा ले रहे हैं।
- भविष्य की योजना: 54% प्रोफेशनल्स एआई एजेंट्स को पूरी तरह अपना चुके हैं, जबकि 43% अगले साल तक इसे लागू करने की तैयारी में हैं।
सेल्सफोर्स साउथ एशिया की एसवीपी (SVP) संगीता गिरी के अनुसार:
"एआई एजेंट्स केवल एक टूल नहीं हैं, बल्कि ये सेल्स टीमों को प्रशासनिक बाधाओं से मुक्त कर ग्राहकों के साथ गहरे और सार्थक रिश्ते बनाने का समय दे रहे हैं।"
हाई-परफॉर्मर्स की पहली पसंद
रिपोर्ट के विश्लेषण से पता चलता है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले विक्रेता (High Performers) अपने समकक्षों की तुलना में 1.7 गुना अधिक एआई एजेंट्स का उपयोग कर रहे हैं। विशेष रूप से 'कोल्ड कॉलिंग' और 'कस्टमर रिसर्च' जैसे कार्यों में एआई के हस्तक्षेप से समय की बर्बादी में 35% से 38% तक की कमी आने की उम्मीद है।
एआई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 82% भारतीय प्रोफेशनल्स अब 'डेटा क्लीनिंग' और हाइजीन को प्राथमिकता दे रहे हैं। डुप्लिकेट डेटा को हटाना और सिस्टम को मानकीकृत करना अब शीर्ष एजेंडा बन गया है, ताकि एआई द्वारा दिए गए परिणाम सटीक और भरोसेमंद हों।
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