विदेशों में कामगारों की सुरक्षा के लिए भारतीय मिशन मुस्तैद, राज्यसभा में पेश हुए राहत भरे आंकड़े
विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि कैसे भारतीय मिशन विदेशों में कामगारों की शिकायतों का 100% तक निपटारा कर रहे हैं।
नई दिल्ली। विदेशों में रोजी-रोटी की तलाश में गए भारतीय श्रमिकों के हितों और उनकी सुरक्षा को लेकर भारत सरकार पूरी तरह गंभीर है। राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने भारतीय प्रवासियों की सुरक्षित और कानूनी आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 'प्रवासन और आवाजाही साझेदारी समझौते' (MMPA) के तहत एक मजबूत तंत्र विकसित किया है।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद मोहम्मद नदीमुल हक द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में पेश किए गए आंकड़े गवाही देते हैं कि भारतीय मिशन शिकायतों के समाधान में बेहद सक्रिय रहे हैं। वर्ष 2025 में कंबोडिया से प्राप्त सभी 640 शिकायतों का समय रहते निपटारा किया गया। इसी तरह मालदीव (855), उज्बेकिस्तान (540) और श्रीलंका (172) जैसे देशों में भी शिकायतों के समाधान का रिकॉर्ड शत-प्रतिशत रहा है।
खाड़ी देशों (GCC) सहित उन राष्ट्रों में जहाँ भारतीय कामगारों की संख्या अधिक है, वहां भी मिशनों ने त्वरित कार्यवाही की है। आंकड़ों के अनुसार:
- मलेशिया: 2532 में से 2519 समस्याओं का समाधान।
- यूएई: 4138 में से 3697 शिकायतों का निपटारा।
- सऊदी अरब: 2877 में से 2325 मामलों को सुलझाया गया।
- ओमान: 2345 में से 2241 समस्याओं का समाधान हुआ।
सरकार ने ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी और यूके जैसे देशों के साथ विशेष समझौते किए हैं। इसके अतिरिक्त इजरायल, जापान और ताइवान जैसे देशों के साथ 'श्रम आवाजाही समझौते' भी किए गए हैं, ताकि भारतीय श्रमिकों को वेतन चोरी, अनुबंध उल्लंघन या पासपोर्ट जब्ती जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। विदेश राज्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि भारतीय मिशन अपने नागरिकों की भलाई के लिए हर समय हरसंभव प्रयास करते हैं।
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