मुंबई में बोले डॉ. जयशंकर— 'जन-केंद्रित नीतियां ही हमारी असली ताकत'

मुंबई में डॉ. जयशंकर ने कहा: भारत की जन-केंद्रित नीतियां और मजबूत अर्थव्यवस्था उसे दुनिया का सबसे भरोसेमंद साथी बनाती हैं।

Feb 17, 2026 - 22:46
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मुंबई में बोले डॉ. जयशंकर— 'जन-केंद्रित नीतियां ही हमारी असली ताकत'

मुंबई (रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी): वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक (Geopolitics) उथल-पुथल के बीच भारत एक मजबूत और भरोसेमंद शक्ति के रूप में उभरा है। मुंबई में आयोजित ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन कॉन्फ्रेंस (17-19 फरवरी) को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की 'जन-केंद्रित नीतियां' और 'राष्ट्रीय क्षमता' ही उसे दुनिया का सबसे विश्वसनीय साझेदार बनाती हैं।

हथियार के रूप में हो रहा संसाधनों का उपयोग
दुनिया की बदलती स्थिति पर चिंता जताते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि आज के दौर में उत्पादन, पैसा और बाजार की ताकत का इस्तेमाल 'हथियार' के तौर पर किया जा रहा है। कई देशों ने निर्यात पर सख्ती बढ़ा दी है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। जयशंकर ने कहा, "शायद यह हमारी जिंदगी का सबसे अधिक उथल-पुथल वाला दौर है, जहाँ पुरानी व्यवस्थाएं बदल रही हैं और हम एक लंबी अनिश्चितता की ओर बढ़ रहे हैं।"

  • भारत का जवाब: क्षमता निर्माण और व्यापार विस्तार
    डॉ. जयशंकर ने बताया कि इन वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत ने अपनी आंतरिक शक्ति बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है:
  • राष्ट्रीय क्षमता: भारत अपनी मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी की क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है।
  • व्यापारिक समझदारी: हाल ही में हुए वैश्विक व्यापार समझौते इस बात का सबूत हैं कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक और सकारात्मक स्थिति में है।
  • जोखिम प्रबंधन: सरकार अपनी आर्थिक नीतियों के माध्यम से भविष्य के जोखिमों को कम कर रही है।

सोशल मीडिया पर साझा किया विजन
कॉन्फ्रेंस के बाद डॉ. जयशंकर ने 'एक्स' (X) पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए लिखा कि भारत आज की अनिश्चित दुनिया में अपनी ताकत बढ़ा रहा है और अपने व्यापार को फैला रहा है। उन्होंने सरकार की व्यावहारिक नीतियों को दुनिया के लिए एक उदाहरण बताया।

इस तीन दिवसीय सम्मेलन (17-19 फरवरी) में विकसित और विकासशील देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यापार कूटनीति और निवेश के भविष्य पर मंथन करना है।

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