कौशाम्बी: सुरक्षा के घेरे में 'मौत' का साया, वन स्टॉप सेंटर में किशोरी ने लगाई फांसी; प्रशासन में हड़कंप

कौशाम्बी के 'वन स्टॉप सेंटर' में 17 वर्षीय किशोरी ने की आत्महत्या; सरकारी सुरक्षा व्यवस्था और सीडब्ल्यूसी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

May 12, 2026 - 22:08
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कौशाम्बी: सुरक्षा के घेरे में 'मौत' का साया, वन स्टॉप सेंटर में किशोरी ने लगाई फांसी; प्रशासन में हड़कंप

(आदर्श भारतीय)

कौशाम्बी। जनपद के करारी थाना क्षेत्र स्थित सरकारी 'वन स्टॉप सेंटर' से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने सरकारी सुरक्षा दावों की पोल खोल कर रख दी है। यहाँ सचवारा गांव की एक 17 वर्षीय किशोरी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जिस केंद्र को महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा और संबल के लिए बनाया गया था, वहीं एक नाबालिग का शव मिलने से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सचवारा गांव की रहने वाली किशोरी (पुत्री फूलचंद सरोज) बीते 17 अप्रैल 2026 को एक युवक के साथ चली गई थी। इस मामले में पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करते हुए किशोरी को बरामद किया था। बताया जा रहा है कि परिजनों द्वारा किशोरी को अपनाने से इनकार करने के बाद, बाल कल्याण समिति (CWC) के आदेश पर उसे 20 दिन पहले सुरक्षित प्रवास के लिए 'वन स्टॉप सेंटर' भेजा गया था।

एक सरकारी केंद्र जहाँ 24 घंटे सुरक्षाकर्मी और स्टाफ की मौजूदगी का दावा किया जाता है, वहाँ एक नाबालिग को आत्महत्या के लिए संसाधन और एकांत कैसे मिल गया?

  • निगरानी में चूक: क्या सेंटर के भीतर सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे थे?
  • काउंसलिंग का अभाव: क्या किशोरी के मानसिक तनाव को समझने की कोशिश की गई?

जिम्मेदार कौन: 20 दिनों से सरकारी संरक्षण में रह रही लड़की ने आखिर किन परिस्थितियों में यह आत्मघाती कदम उठाया?

घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचकर केंद्र को घेरे में ले लिया। शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरवाया गया है और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। विभागीय अधिकारी वर्तमान में सेंटर के कर्मचारियों से पूछताछ कर रहे हैं ताकि आत्महत्या के कारणों की तह तक पहुँचा जा सके।

इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि बाल संरक्षण इकाई की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। ग्रामीणों और परिजनों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है। लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर सरकारी महकमों की नाक के नीचे एक बेटी की जान कैसे चली गई?

अब देखना यह होगा कि इस मामले में किन अधिकारियों या कर्मचारियों पर गाज गिरती है और क्या मृतका को न्याय मिल पाएगा।

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