महेवा घाट में 'हरियाली' पर माफिया का प्रहार: 1 लाख का पेड़ और महज 10 हजार का जुर्माना

कौशांबी के महेवा घाट में प्रतिबंधित हरे पेड़ों के कटान से हड़कंप, पुलिस और वन विभाग पर मिलीभगत के गंभीर आरोप

May 10, 2026 - 21:05
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महेवा घाट में 'हरियाली' पर माफिया का प्रहार: 1 लाख का पेड़ और महज 10 हजार का जुर्माना

(एडवोकेट अजय पंडा / ब्यूरो)

कौशांबी। जिले के महेवा घाट थाना क्षेत्र में प्रतिबंधित हरे-भरे पेड़ों पर लकड़ी माफियाओं की कुल्हाड़ी बेखौफ चल रही है। सरकार और प्रशासन जहां एक ओर पौधारोपण के लिए करोड़ों खर्च कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर माफिया 'बोटी-बोटी' काटकर पर्यावरण को जख्म दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग और पुलिस की मिलीभगत से यह काला खेल खुलेआम फल-फूल रहा है।

PWD के पेड़ पर 'सेटिंग' वाला एक्शन?
अभी कुछ दिन पहले ही महेवा घाट क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी (PWD) के एक बेशकीमती हरे-भरे पेड़ को माफियाओं ने धराशाई कर दिया था। इस मामले में पुलिस और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि जब पेड़ कटान की खबर वायरल हुई, तो औपचारिकता पूरी करने के लिए माफियाओं पर महज 10,000 रुपये का जुर्माना लगाकर मामला रफा-दफा कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पेड़ की बाजार में कीमत 1 लाख रुपये से अधिक थी, उसे काटने वालों को इतने कम जुर्माने में छोड़ देना विभाग की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

शनिवार को फिर गिरा आम का हरा पेड़
ताजा मामला शनिवार का है, जहां महेवा घाट थाना क्षेत्र के पोतनिहा का पुरवा (घोसीपुर टंकी के पास) माफियाओं ने एक विशालकाय हरे-भरे आम के पेड़ को काटकर धराशाई कर दिया। ताज्जुब की बात यह है कि सरकार की ओर से फलदार और हरे-भरे पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं दी जाती, फिर भी माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिनदहाड़े इस जघन्य अपराध को अंजाम दे रहे हैं।

संरक्षण के साये में 'जघन्य अपराध'
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इन लकड़ी माफियाओं को स्थानीय पुलिस और वन विभाग के कुछ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। आरोप है कि जैसे ही कोई खबर वायरल होती है, विभाग सक्रिय होने का नाटक करता है और पहले ही माफियाओं को सूचना दे दी जाती है ताकि वे साक्ष्य मिटा सकें या मामूली जुर्माना भरकर फिर से सक्रिय हो जाएं।

इस पूरे प्रकरण ने शासन के 'ग्रीन यूपी' मिशन पर सवालिया निशान लगा दिया है। आखिर इन माफियाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं होती और किसके इशारे पर ये 'पेड़ के दुश्मन' क्षेत्र की हरियाली उजाड़ रहे हैं?

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