सराय अकिल: किसके 'सफेदपोश' संरक्षण में फल-फूल रहा गांजे का काला कारोबार? युवाओं की जिंदगी दांव पर
कौशाम्बी के सराय अकिल में गांजे का अवैध कारोबार चरम पर; युवाओं का भविष्य बर्बाद, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
(एडवोकेट अजय पंडा / ब्यूरो)
कौशाम्बी। जनपद के सराय अकिल थाना क्षेत्र में इन दिनों नशे का काला कारोबार अपनी जड़ें गहरी कर चुका है। स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के दावों ने पुलिसिया इकबाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि क्षेत्र में गांजे की अवैध बिक्री किसी रसूखदार के संरक्षण में बेखौफ होकर चल रही है, जिसकी चपेट में आकर स्कूली छात्रों से लेकर बुजुर्ग तक अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो सराय अकिल कस्बे और आसपास के ग्रामीण इलाकों में गांजे की पुड़िया सब्जी-भाजी की तरह आसानी से उपलब्ध है। शाम ढलते ही क्षेत्र के कुछ चिन्हित अड्डों पर नशेड़ियों की महफिलें सजने लगती हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन रास्तों से पुलिस की गश्त गुजरती है, उन्हीं रास्तों के आसपास यह अवैध धंधा संचालित हो रहा है। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि बिना पुलिस और रसूखदारों की मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर नशा बेचना मुमकिन नहीं है।
नशे के इस जाल ने सबसे ज्यादा युवाओं और स्कूली छात्रों को निशाना बनाया है। अभिभावकों का कहना है कि कम उम्र के लड़के गांजे की लत के कारण अपराध की ओर बढ़ रहे हैं। नशे की वजह से न केवल स्वास्थ्य गिर रहा है, बल्कि मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों में आर्थिक तंगी और घरेलू हिंसा (क्लेश) का ग्राफ भी तेजी से ऊपर जा रहा है। ग्रामीणों का तीखा सवाल है— "जब हर आम आदमी को पता है कि गांजा कहाँ बिक रहा है, तो खाकी की नजरें इन अड्डों से क्यों चूक रही हैं?"
इस गंभीर मामले पर सराय अकिल पुलिस का वही पुराना और औपचारिक जवाब सामने आया है। पुलिस का कहना है कि वे लगातार अभियान चला रहे हैं और सूचना मिलने पर कार्रवाई की जाती है। हालांकि, धरातल पर स्थिति इसके ठीक उलट नजर आती है। स्थानीय जागरूक नागरिकों ने अब पुलिस अधीक्षक (एसपी) कौशाम्बी से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर इन नशे के सौदागरों पर तत्काल नकेल नहीं कसी गई, तो सराय अकिल की आने वाली पीढ़ी पूरी तरह नशे के दलदल में धंस जाएगी।
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