अवध कॉलेजिएट की सभी शाखाओं में भावविभोर करने वाला 'मातृ-वंदन' समारोह
अवध कॉलेजिएट में मदर्स डे पर भावुक क्षण; बच्चों ने धोए माताओं के चरण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जीता सबका दिल
(अतुल गुप्ता)
लखनऊ : राजधानी के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान अवध कॉलेजिएट की सभी शाखाओं में 'मदर्स डे' का पर्व केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि संस्कारों के महाकुंभ के रूप में मनाया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में जब नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपनी माताओं के चरण पखारे और उनका आशीर्वाद लिया, तो उपस्थित जनसमूह की आँखें नम हो गईं। यह दृश्य भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के सुंदर समन्वय का प्रतीक बन गया।
कार्यक्रम का आकर्षण केवल भावुक क्षणों तक ही सीमित नहीं था। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता और कला के माध्यम से अपनी जननी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। जहाँ एक ओर कार्ड मेकिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी भावनाओं को रंगों और शब्दों के माध्यम से उकेरा, वहीं दूसरी ओर मंच पर हुए नृत्य, भावपूर्ण गीतों और ओजस्वी भाषणों ने माताओं के त्याग और समर्पण की गाथा सुनाई। विद्यालय की दरोगा खेड़ा, रामगढ़, पारा और मोहन शाखाओं में उत्साह का वातावरण ऐसा था मानो पूरा परिसर एक बड़े परिवार में तब्दील हो गया हो।
विद्यालय की निदेशिका श्रीमती जतिंदर वालिया ने उपस्थित माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक माँ बच्चे की प्रथम गुरु होती है। उन्होंने जोर दिया कि माँ द्वारा दिए गए संस्कार ही बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे जीवन के हर मोड़ पर अपनी माता का सम्मान करें।
आदरणीय प्रबंधक श्री सर्वजीत सिंह जी ने इस सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "माँ का स्थान सृष्टि में सर्वोच्च है और उनके सम्मान में किया गया यह आयोजन विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।" उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए शिक्षकों और विशेष रूप से माताओं की गरिमामयी उपस्थिति की सराहना की।
इस अवसर पर विभिन्न शाखाओं की प्रधानाचार्याएँ—श्रीमती इंदु चंदेल (दरोगा खेड़ा), श्रीमती नीरजा सिंह (रामगढ़), श्रीमती देबजानी मुखर्जी (पारा) और श्रीमती अनीता झा (मोहन)—उपस्थित रहीं। सभी शिक्षाविदों ने एक स्वर में माना कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों का विकास होता है।
कार्यक्रम का समापन हर्षोल्लास के साथ हुआ, लेकिन बच्चों के चेहरों पर अपनी माताओं के प्रति सम्मान का जो भाव था, वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा। अवध कॉलेजिएट ने एक बार फिर सिद्ध किया कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि संस्कारों का पोषण करना भी है।
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