अभावों को पछाड़ त्रिशनित ने रची सफलता की इबारत: टूटी कलम से लिखा जीत का नया अध्याय
विषम परिस्थितियों के बावजूद त्रिशनित ने सीबीएसई हाईस्कूल परीक्षा में 67% अंक पाकर अवध कॉलेजिएट और माता-पिता का नाम रोशन किया
लखनऊ: अक्सर कहा जाता है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, लेकिन जब हालात पूरी तरह विपरीत हों और भविष्य धुंधला नजर आ रहा हो, तब सफलता के शिखर तक पहुँचना किसी चमत्कार से कम नहीं लगता। राजधानी के अवध कॉलेजिएट की छात्रा त्रिशनित ने अपनी मेहनत और अटूट हौसले से इस कहावत को सच कर दिखाया है। सीबीएसई हाईस्कूल की परीक्षा में 67% अंक प्राप्त कर त्रिशनित ने न केवल अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊँचा किया है, बल्कि उन सभी के लिए एक मिसाल पेश की है जो मुश्किलों के आगे घुटने टेक देते हैं।
त्रिशनित की यह सफलता अंकों के आंकड़ों से कहीं बड़ी है। उनके पिता एक स्थानीय होटल में कार्यरत हैं और माता गुरुद्वारे में सेवादार के रूप में अपनी सेवाएं देती हैं। घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि पढ़ाई का खर्च आसानी से उठाया जा सके। कई बार ऐसा दौर भी आया जब 'टूटी कलम और अधूरे सपनों' के बीच संघर्ष करना पड़ा, लेकिन त्रिशनित ने हार मानने के बजाय लड़ने का रास्ता चुना।
इस कठिन यात्रा में अवध कॉलेजिएट के प्रबंधक श्री सर्वजीत सिंह और निर्देशिका श्रीमती जतिंदर वालिया फरिश्ता बनकर सामने आए। विद्यालय प्रबंधन ने न केवल त्रिशनित को आर्थिक सहयोग प्रदान किया, बल्कि शिक्षकों ने भी कदम-कदम पर उसका उत्साहवर्धन किया। विद्यालय की ओर से मिली फीस माफी और संबल ने त्रिशनित को मानसिक रूप से मजबूत किया, जिससे वह अपना पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई पर केंद्रित कर सकी।
अपनी इस उपलब्धि का श्रेय त्रिशनित ने अपने माता-पिता के त्याग और विद्यालय प्रबंधन के मार्गदर्शन को दिया है। त्रिशनित का कहना है, "जहाँ हालात नामुमकिन कह रहे थे, वहाँ मेरे शिक्षकों के विश्वास ने मुझे मुमकिन की राह दिखाई।" प्रबंधक महोदय और निर्देशिका महोदया ने छात्रा को मिठाई खिलाकर बधाई दी और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि ऐसी मेधावी बेटियाँ ही समाज का असली गौरव हैं। त्रिशनित की यह कहानी हमें सिखाती है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो गरीबी की दीवारें आपकी उड़ान नहीं रोक सकतीं।
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