कौशांबी: भरवारी रेलवे स्टेशन के पास धू-धू कर जली गेहूं की फसल, मेहनत की कमाई राख में तब्दील
कौशांबी के भरवारी में भीषण आग से गेहूं की फसल स्वाहा। किसान का भारी नुकसान, ग्रामीणों ने की मुआवजे की मांग।
(एडवोकेट अजय पंडा / ब्यूरो)
कौशांबी। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जनपद में भीषण गर्मी और तपती धूप के बीच किसानों की मुसीबतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला कोखराज थाना क्षेत्र के भरवारी रेलवे स्टेशन के पास का है, जहाँ पुराने पावर हाउस के ठीक सामने स्थित एक लहलहाते गेहूं के खेत में अचानक आग लग गई। इस अग्निकांड में किसान की साल भर की मेहनत चंद मिनटों में जलकर खाक हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर के वक्त जब हवा की गति थोड़ी तेज थी, तभी अचानक खेत के एक कोने से धुंआ उठने लगा। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, सूखी गेहूं की फसल ने आग को पकड़ लिया और लपटें आसमान छूने लगीं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। स्थानीय ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए मौके पर दौड़ लगाई और अपने स्तर पर निजी संसाधनों से आग पर काबू पाने की जी-तोड़ कोशिश की, लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि फसल को बचाया नहीं जा सका।
इस घटना में किसान की पूरी फसल जलकर राख हो गई है। पीड़ित किसान के लिए यह आर्थिक और मानसिक रूप से एक बड़ा आघात है, क्योंकि गेहूं की कटाई का समय नजदीक था और उसे इस फसल से काफी उम्मीदें थीं। आग बुझने के बाद खेत में केवल राख और जले हुए अवशेष ही नजर आ रहे थे।
घटना की सूचना मिलते ही भारी संख्या में स्थानीय लोग और राहगीर मौके पर जमा हो गए। हालांकि, आग लगने के सटीक कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। आशंका जताई जा रही है कि रेलवे ट्रैक की ओर से आई किसी चिंगारी या राहगीर द्वारा फेंकी गई सुलगती बीड़ी-सिगरेट की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है।
घटना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों और किसान यूनियन से जुड़े लोगों ने गहरा रोष व्यक्त किया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और क्षेत्रीय लेखपाल से तत्काल नुकसान का आकलन करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि पीड़ित किसान अत्यंत निर्धन है, ऐसे में शासन को उसे उचित आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए ताकि वह इस संकट की घड़ी से उबर सके।
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