भारत और जापान ने मुंबई में कूटनीति के नए अध्याय की शुरुआत की
मुंबई में भारत और जापान के बीच पहली एआई रणनीतिक वार्ता संपन्न; तकनीकी सहयोग और भविष्य की चुनौतियों पर बनी सहमति
मुंबई: तकनीकी क्षेत्र में दुनिया के दो दिग्गज देश, भारत और जापान, अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मोर्चे पर एक साथ कदम बढ़ाएंगे। मुंबई में आयोजित पहली 'भारत-जापान एआई रणनीतिक वार्ता' दोनों देशों के बीच एक मजबूत और दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी की नींव साबित हुई है। इस उच्च-स्तरीय बैठक का उद्देश्य नीति, प्रतिभा और उद्योग को एक साझा मंच पर लाकर एक भरोसेमंद एआई इकोसिस्टम तैयार करना है।
इस ऐतिहासिक वार्ता की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (साइबर कूटनीति) अमित ए. शुक्ला और जापान के उप सहायक मंत्री हनादा ताकाहिरो ने की। बैठक के दौरान सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर से लेकर औद्योगिक अनुप्रयोगों (Industrial Applications) तक, पूरे 'एआई स्टैक' में सहयोग को विस्तार देने पर गहन चर्चा हुई।
दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि अगले दशक में एआई के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों का सामना मिलकर किया जाएगा। इसका मुख्य लक्ष्य सह-निर्माण (Co-creation) को बढ़ावा देना और अगली पीढ़ी को तकनीकी रूप से एक-दूसरे के और करीब लाना है।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस संवाद में न केवल नीतियों के तालमेल पर बात हुई, बल्कि 'एआई टैलेंट' की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को सुगम बनाने पर भी विचार किया गया। दोनों पक्ष संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एआई प्रशासन (AI Governance) के क्षेत्र में एक-दूसरे का सहयोग करने के लिए सहमत हुए हैं।
यह वार्ता 'भारत-जापान एआई सहयोग पहल' का हिस्सा है, जिसकी घोषणा अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान की गई थी। यह सहयोग 'अगले दशक के लिए भारत-जापान संयुक्त दृष्टिकोण' का एक मुख्य आधार है।
मुंबई में हुई इस सफल बैठक के समापन पर यह निर्णय लिया गया कि इस रणनीतिक संवाद का अगला संस्करण जापान में आयोजित किया जाएगा, जिससे इस तकनीकी गठबंधन को और अधिक मजबूती मिलेगी। इस पहल से न केवल दोनों देशों की घरेलू अर्थव्यवस्था को लाभ होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक सुरक्षित और नवाचारी एआई ढांचा भी विकसित होगा।
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