शिमला समेत देश के कई शहर हो जाएंगे तबाह! नास्त्रेदमस नहीं, इस किताब में छपी है सबसे बड़ी चेतावनी

टिकेंद्र सिंह पंवर की नई किताब 'सिटी लिमिट्स' ने अनियोजित शहरीकरण और शिमला सहित भारतीय शहरों पर मंडराते विनाश के खतरों पर बड़ी चेतावनी दी है

Jun 08, 2026 - 14:41
Updated: 3 hours ago
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शिमला समेत देश के कई शहर हो जाएंगे तबाह! नास्त्रेदमस नहीं, इस किताब में छपी है सबसे बड़ी चेतावनी

शिमला: अकसर लोग फ्रांस के दिव्य दृष्टि संपन्न भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस की विनाश संबंधी भविष्यवाणियों को चर्चा करते हैं. ये भविष्य कथन ज्योतिष या दिव्य दृष्टि से उपजे ज्ञान के माध्यम से किए गए हैं, लेकिन यहां हम वैज्ञानिक अध्ययन और पर्यावरण में बदलाव सहित अनियोजित शहरीकरण के कारण पैदा हुए विनाश के संकेतों की बात करने जा रहे हैं.

हाल ही में झारखंड के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान और हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू की मौजूदगी में एक किताब का लोकार्पण किया गया. शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर टिकेंद्र सिंह पंवर ने यह किताब लिखी है. इस किताब में गहन शोध और तथ्यों के मूल्यांकन के बाद शिमला सहित देश के अन्य बड़े शहरों पर मंडरा रहे खतरे को शब्दों में दर्ज किया गया है. ETV भारत ने 'सिटी लिमिट्स, क्राइसिस ऑफ अर्बनाइजेशन' नामक पुस्तक के लेखक से बात की.

टिकेंद्र पंवर ने कहा कि कोविड के काल में पुस्तक को लिखने की प्रेरणा मिली थी. उन्होंने सवाल उठाया कि देश में स्मार्ट सिटी को लेकर बहुत सी बातें हुई हैं. अगर लोगों से अधिक पैसा संचय करने वाले सूरत शहर की बात करें तो वह कोविड काल में अपने लोगों को 24 घंटे भी नहीं रोक पाया था. इसलिए लोग वहां से वापस लौटे और रास्ते में कई मौतें भी हुईं. वहां से हमने पुस्तक लिखने की शुरुआत की है. उन्होंने कहा कि जो लोग शहर का निर्माण कर रहे हैं,

वहीं शहर उनको 24 घंटे भी नहीं रख सकता है. यह किस तरह के शहर निर्माण की बात हो रही है. इस पुस्तक का सबसे पहले दिल्ली में हुआ था. उन्होंने कहा कि अगर पिछली शताब्दी को देखें तो उसके फासीवाद का आना, रूस की क्रांति और भारत में राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन का होना तीन बेसिक डिफाइंड मूवमेंट थे. लेकिन, इस शताब्दी का डिफाइंड मूवमेंट शहरीकरण है. उन्होंने कहा कि दुनिया में 50 फीसदी से अधिक लोग शहरों में रहने वाले हो गए हैं. इसमें भी सबसे अधिक शहरों में बसने वाली आबादी भारत की है.

पर्यावरणविद टिकेंद्र पंवर ने कहा कि जिस तरह से यह शहरीकरण हो रहा है, उसमें अंदर से विस्फोट हो रहा है. शहरों में जो शहरीकरण का रास्ता है यह टिकाऊ नहीं है शहरों में इतनी ज्यादा गैर बराबरी हो रही है कि किसी के पास इतना अधिक पैसा है कि वह 100 करोड़ के घर खरीद रहे हैं और दूसरी तरफ 40 फीसदी लोग स्लम में रह रहे हैं. इस पर एक नई समस्या जलवायु संकट की खड़ी हो गई है. यह प्राकृतिक आपदा, कहर या किसी प्रकार की बुरी मंशा से नहीं हुआ है. ये दरअसल कार्बन गैसेस का परिणाम है.
शहरों में अनप्लांट डेवलपमेंट से बड़ा खतरा
टिकेंद्र पंवर ने कहा कि पूरी दुनिया में गर्मी अधिक हो रही है. हम सामान्य से अधिक 1.4 डिग्री तापमान पर पहुंच चुके हैं, जिस कारण अत्यधिक बारिश, अधिक गर्मी या फिर अधिक सर्दी पड़ रही है. यह सब कुछ बड़े कॉर्पोरेट घरानों की वजह से हुआ है. पहले इस तरह का नुकसान नहीं होता था. उन्होंने कहा कि हमारे शहरों में जो अनप्लांट डेवलपमेंट है या फिर प्लांड डेवलपमेंट हुई है. ये दोनों ही तरह की डेवलपमेंट शहरों के लिए खतरनाक है. किस तरह से यह शहर अब वातावरण और लोगों के हिसाब से अधिक टिकाऊ नहीं रहे हैं. इस तरह से हमने किताब में जवाब देने की कोशिश नहीं बल्कि सवाल खड़े करने का प्रयास किया है? उन्होंने कहा कि गांव की गरीबी लोगों को शहरों की तरफ धकेल रही है, जिससे शहरों का विस्तार हो रहा है. अगर अभी भी नहीं संभले तो आने वाले समय में स्थिति और खराब हो जाएगी.

शहरों की गवर्नेंस को लेकर उठाया सवाल
टिकेंद्र पंवर ने कहा, "शहर को चलाने का जिम्मा शहर की सरकार का होना चाहिए. लेकिन, भारत में शहर के मुखिया मेयर के पास कोई ताकत नहीं है. अगर शहर के मॉडल को टिकाऊ बनाना है तो इसकी गवर्नेंस शहरों को सौंपनी होगी. अन्य देशों में मेयर का पास बहुत अधिक ताकत है. उनके शहरों का बजट ही हमारे राज्य से अधिक है. वहां पर मेयर 8 से 10 घंटे तक शहर की योजना बनाने पर काम करते हैं, लेकिन हमारे यहां अधिकतर समय लोगों की शिकायतें सुनने में ही चला जाता है. ऐसे सिस्टम नहीं चलता है. मेयर की जवाबदेही MLA से अधिक होती है. इसलिए मेयर को अधिकारियों की ACR लिखने की शक्ति देनी होगी. शहरों में जो विभाग हैं, उनको मेयर को देखना चाहिए. शहर की योजना का काम मेयर और यहां की काउंसिल का होना चाहिए."
नए शहरों को बसाने की जरूरत
टिकेंद्र पंवर ने शहरों पर से दबाव कम करने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि गांव में हर सुविधा नहीं दे सकते हैं. इसके लिए हमको रीजनल डेवलपमेंट करनी होगी. जहां बेहतर शिक्षा के साथ अन्य सभी तरह की सुविधाएं हों. उन्होंने कहा कि शहरों में कृषि होना भी जरूरी है. जब शहरों की क्षमता से अधिक दबाव हो जाए तो इसे कम करने के लिए नए शहर बसाने की तरफ बढ़ाना चाहिए. वहां पर अधिक सुविधाएं देनी चाहिए. वहीं, उन्होंने कहा कि शिमला को डी कन्जेस्ट करने के लिए यहां से कुछ चीजों को बाहर निकलना होगा. लेकिन, इसके लिए बहुत अधिक पैसे की जरूरत है ऐसे में यह बहुत चैलेंजिंग कार्य भी है.

टिकेंद्र पंवर ने कहा कि पहले लोग राजनीतिक पारी लंबा खेलते थे तो योजना भी 30 साल को ध्यान में रखकर तैयार की जाती थी. लेकिन, अब राजनीति रील की तरह छोटी हो गई है. इसलिए राजनीति में शामिल लोग 5 साल से अधिक का विजन नहीं देखते हैं. ऐसे में पांच साल के विजन से हम 50 साल का एजेंडा सेट नहीं कर सकते हैं.

विज्ञान से भागकर विकास का रास्ता नहीं हो सकता
वहीं, सरकार शहरों में खतरनाक हो रही स्थिति से निकलने के लिए क्या करें, इस सवाल के जवाब में टिकेंद्र पंवर ने कहा कि अब बटर पेपर से काम नहीं चलेगा. शहर में अब एक्यूपंचर का काम करना होगा. उन्होंने कहा कि अभी स्थिति ये है कि एक बड़े भूकंप के झटके से शिमला में 20 हजार लोग मरेंगे.

सबसे पहले आईजीएमसी की बिल्डिंग ढह जाएगी. ऐसे में जब यही बिल्डिंग नहीं बचेगी तो लोग कहां जाएंगे. यह हकीकत है. इसलिए बिल्डिंग को मजबूती देना जरूरी है. इसके लिए ड्रेनेज सिस्टम को री डिजाइन करना होगा. उन्होंने कहा कि सरकार को हिमाचल की एक एक इंच की जियोलॉजी और हाइड्रोलॉजी मैपिंग करनी चाहिए. ताकि बिना रिस्क के शहर की योजना को तैयार हो सके. उन्होंने कहा कि विज्ञान से भाग कर विकास का रास्ता नहीं हो सकता है, हमें विज्ञान से जुड़कर ही विकास के रास्ते को निकालना होगा.

आने वाले समय में स्थिति भयानक
टिकेंद्र पंवर ने कहा कि भविष्य के लिए वर्तमान शहरीकरण की स्थिति बहुत भयानक होने वाली है. यह मैं नहीं बोल रहा हूं यह जो दुनिया के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घराने हैं उनके जो थिंक टैंक है, वे कह रहे हैं कि शहरों की स्थिति विस्फोटक हो रही है. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन को ध्यान में ना रखते हुए हम जिस तरह का विकास कर रहे हैं, यह शहर के लिए ठीक नहीं है. वहीं, नई डिजिटल प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस नए प्रोसेस पैसा संचय हो रहा है. उन्होंने कहा कि पहली बार दुनिया में बिना काम के पैसा एकत्रित किया जा रहा है. इसलिए जितना भी डिजिटल आधार पर विकास का रास्ता है. उसकी ताकत शहर को मिलनी चाहिए. यानी डिजिटल कंट्रोल शहर की सरकार के पास रहना चाहिए. (etv)

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